रामदिनेश यादव / मुंबई
देह में युवाओं की आवाज को दरकिनार करनेवाली केंद्र की भाजपा सरकार और सरकारी सिस्टम के खिलाफ महाराष्ट्र से शुरू हुई एक डिजिटल मुहिम ने देश की सियासत और सोशल मीडिया की दुनिया में हलचल मचा दी है। खुद को ‘जेन-जी की आवाज’ बताने वाली ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ नाम की ऑनलाइन राजनीतिक मुहिम ने इंस्टाग्राम पर रिकॉर्डतोड़ बढ़त हासिल करते हुए पहले भाजपा और अब कांग्रेस के आधिकारिक हैंडल को भी फॉलोअर्स के मामले में पीछे छोड़ दिया है। पांच दिन से भी कम समय में इस अकाउंट के फॉलोअर्स १.५ करोड़ के करीब पहुंचने का दावा किया जा रहा है। सोशल मीडिया पर इस तेजी से हुई ग्रोथ ने राजनीतिक विश्लेषकों को भी चौंका दिया है। कॉकरोच जनता पार्टी की बढ़ती लोकप्रियता से सरकार डर गई है। उसे रोकने के लिए अब तरह-तरह के हथकंडे अपनाए जा रहे हैं।
इस मुहिम के केंद्र में महाराष्ट्र के युवा कंटेंट क्रिएटर और सोशल मीडिया एक्टिविस्ट अभिजीत दिमके का नाम तेजी से चर्चा में आया है। दीपके और उनकी टीम ने बेरोजगारी, पेपर लीक, महंगाई, डिजिटल सेंसरशिप और राजनीतिक ध्रुवीकरण जैसे मुद्दों को आक्रामक सोशल मीडिया वैंâपेन के जरिए उठाया। यही वजह है कि बड़ी संख्या में युवा इस मुहिम से जुड़ते चले गए। खास बात यह है कि यह पूरा अभियान पारंपरिक राजनीतिक रैलियों के बजाय मीम्स, छोटे वीडियो, व्यंग्य और युवाओं की नाराजगी को डिजिटल भाषा में पेश करके आगे बढ़ा है।
एक्स अकाउंट ब्लॉक किया गया
इसी बीच ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ का एक्स सोशल मीडिया पर अकाउंट भारत में ब्लॉक हो जाने के बाद विवाद और बढ़ गया है। पार्टी के संस्थापक ने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो जारी कर दावा किया कि पहले उनके सोशल मीडिया अकाउंट्स को हैक करने की कोशिश हुई और इसी वजह से एक्स हैंडल को भारत में रोक दिया गया है। हालांकि, अन्य देशों में यह अकाउंट अब भी एक्सेस किया जा सकता है।
विपक्ष ने दिया समर्थन
जहां भाजपा लंबे समय से मजबूत आईटी और सोशल मीडिया नेटवर्क के लिए जानी जाती रही है, वहीं एक नए और व्यंग्यात्मक डिजिटल अभियान का अचानक इतना बड़ा जनसमर्थन सत्ता पक्ष के लिए चेतावनी माना जा रहा है।
महाराष्ट्र से निकली डिजिटल राजनीति की नई लहर?
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह सिर्फ एक वायरल अकाउंट नहीं, बल्कि युवाओं की बदलती राजनीतिक अभिव्यक्ति का संकेत हो सकता है। महाराष्ट्र लंबे समय से छात्र आंदोलनों और राजनीतिक प्रयोगों की जमीन रहा है। अब वही असंतोष सोशल मीडिया के जरिए नए रूप में दिखाई दे रहा है।
