देश के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की प्रेरणा से कॉकरोच जनता पार्टी की स्थापना हुई है। हमारे प्रधानमंत्री मोदी हमेशा कहते रहते हैं कि भारत युवाओं का देश है। युवाओं में हर चुनौती से जूझने की ताकत होती है। भारतीय सीमाओं पर सेना और वायुसेना में युवा अपना शौर्य दिखा रहे हैं। मोदी जी की कृपा से असंख्य युवा सेना में ‘अग्निवीर’ भी बने, लेकिन मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत द्वारा इन सभी युवाओं को कॉकरोच समझने का दृष्टिकोण व्यक्त करने के बाद से, दो पैर, एक दिमाग और दिल रखनेवाले कॉकरोचों ने भारतीय कॉकरोच जनता पार्टी की स्थापना कर ली है। उनकी ‘बीजेपी’ है तो इन कॉकरोच की पार्टी का नाम ‘सीजेपी’ है। इस कॉकरोच पार्टी ने लाखों युवाओं को अपनी ओर आकर्षित किया है। फिलहाल, इस पार्टी का अस्तित्व ‘सोशल मीडिया’ पर ही है, लेकिन मोदी और उनकी पार्टी भी २०१४ में इसी सोशल मीडिया का इस्तेमाल करके चुनाव मैदान में उतरी थी और सत्ता में आई थी। और फिर मोदी जी ने युवाओं को कई बार सोशल मीडिया का महत्व समझाया है। ‘रील’ बनाना आज रोजगार कमाने का एक जरिया बन चुका है। इसीलिए वे खुद भी रील बनाकर चार पैसे कमाते होंगे और उसी गाढ़ी कमाई के पैसों से इटली की मिस मेलोनी के लिए ‘मेलोडी चॉकलेट’ का तोहफा ले गए होंगे। दूसरी तरफ गृहमंत्री अमित शाह तो भाजपा के साइबर सैनिकों के सम्मेलन बुलाते हैं और उन्हें सिखाते हैं कि विरोधियों पर हमले वैâसे करने हैं और ‘गोएबल्स’ (दुष्प्रचार की) पद्धति से प्रोपेगैंडा वैâसे पैâलाना है। आम आदमी पार्टी का प्रचार-प्रसार भी सोशल मीडिया के जरिए ही होता रहा है इसलिए हम मानते हैं कि इस नवगठित कॉकरोच जनता पार्टी का भविष्य बेहद उज्ज्वल है। भारतीय युवाओं को मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत का आभार मानना चाहिए। उन्होंने भारतीय युवाओं को ‘कॉकरोच’ कहकर न्याय का बहुत बड़ा काम किया है। इसीलिए यह कॉकरोच मंडली की पार्टी बेहद खास है। कॉकरोच एक ऐसा जीव है, जो अत्यंत कठिन परिस्थितियों में भी जीवित रहता है। वह सिस्टम से लड़ता है और खुद को बनाए रखता है। कॉकरोचों को खत्म करने के लिए न जाने कितने प्रकार की
जहरीली दवाइयां
बनाई गईं, उनका भारी विज्ञापन किया गया; फिर भी आज तक मच्छर और कॉकरोच को कोई मिटा नहीं सका है। कॉकरोच कभी निराश नहीं होता। वह विषम परिस्थितियों में भी जीने का रास्ता ढूंढ लेता है। भारतीय युवा भी ठीक उसी कॉकरोच की तरह है। वह अपना गुस्सा जाहिर करता है, विद्रोह की कोशिश करता है, नौकरी की कतारों में चप्पलें घिसता है, हारता है और फिर से एक नई शुरुआत करता है। कॉकरोच कोई परजीवी नहीं है। वह आलसी या बेरोजगार नहीं है; अगर वह आलसी होता तो बहुत पहले ही विलुप्त हो गया होता। इन भारतीय कॉकरोचों को खत्म करने के लिए भाजपा ने उनके दिमाग पर कब्जा कर लिया। उनके कंधों पर केशरी गमछा डाल दिया। उनके माथे पर तिलक लगाकर उन्हें धर्मांध बना दिया। नकली हिंदुत्व की दीक्षा देकर उनके सोचने-समझने की शक्ति को कुंद कर दिया। इसके बावजूद, मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की प्रेरणा से मात्र दो दिनों के भीतर लाखों ‘कॉकरोच’ एकजुट हो गए हैं। ‘अभिजीत दीपके’ नामक ३० वर्षीय युवा बोस्टन यूनिवर्सिटी का छात्र है। जैसे ही उसने कॉकरोच जनता पार्टी की स्थापना की, लाखों युवा इस पार्टी के समर्थक बन गए। इस एकजुटता से सरकार डर गई है। सरकार इन कॉकरोचों से इस कदर खौफ खा गई कि उसने कॉकरोच जनता पार्टी का सोशल मीडिया अकाउंट ही बंद कर दिया। सरकार के हाथ में प्रतिबंध का यही एक इकलौता हथियार बचा है। यह सरकार नॉर्वे की महिला पत्रकार ‘हेले लेंग’ से डर गई। सरकार एपस्टीन से डर गई और अब सरकार कॉकरोच से डर गई है। जो सरकार कॉकरोच से डर जाए, वह शासन करने के लायक ही नहीं है। कॉकरोच जनता पार्टी असल में भारतीय युवाओं का एक व्यंग्यात्मक विद्रोह है। ‘आलसी और बेरोजगार युवाओं की आवाज’ यह इस कॉकरोच पार्टी का मुख्य नारा है। इस पार्टी का प्रतीक चिह्न भी ‘कॉकरोच’ ही है। वह कहता है, ‘हां, हम कॉकरोच हैं। तुम हमें मारोगे, हम फिर वापस आएंगे। हम अमर हैं।’ बेशक, अगर कॉकरोच जनता पार्टी भारतीय युवाओं के भीतर के असंतोष का विस्फोट है तो यह मानना पड़ेगा कि इस युवा वर्ग को सही दिशा दिखाने में देश का विपक्ष पूरी तरह नाकाम रहा है। ‘आम आदमी पार्टी’ में भी ऐसे कई
क्रांतिकारी कॉकरोच
हुआ करते थे। लेकिन उन कॉकरोचों में भी फूट डालने का काम मोदी सरकार ने किया। मोदी सरकार की यह धारणा बन चुकी है कि देश में कोई भी अन्य राजनीतिक दल, क्षेत्रीय पार्टी या संगठन बचना ही नहीं चाहिए। देश अब एकदलीय शासन की ओर बढ़ रहा है। उस व्यवस्था में संविधान, लोकतंत्र और जनता की भावनाओं का कोई मोल नहीं रह गया है, लेकिन आवाज दबाने की ऐसी कोशिशें दुनिया के जिन-जिन देशों में हुईं, वहां ‘उार्ह ै’ यानी कॉकरोच सड़कों पर उतर आए और कॉकरोचों के इस हमले में वहां की अहंकारी सरकारें मटियामेट हो गईं। इसलिए काॅकरोचों के इस नए संगठन पर बहुत बड़ी जिम्मेदारी है। कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत का कहना है, ‘भारत का सिस्टम इस कदर सड़ चुका है कि अब उसके खिलाफ लड़ने के लिए कॉकरोचों को ही बाहर आना पड़ेगा।’ राजनीति में ‘व्यंग्य’ हमेशा से एक बेहद शक्तिशाली हथियार रहा है। व्यंग्यचित्रकार बालासाहेब ठाकरे ने अपने व्यंग्य के तीरों से तत्कालीन व्यवस्था पर करारा प्रहार किया था, जिससे शिवसेना जैसी युवाओं की पार्टी का उदय हुआ था। कांग्रेस में भी कभी युवा क्रांतिकारी हुआ करते थे। वे कॉकरोच देश के लिए फांसी के फंदे पर झूल गए। भ्रष्ट सिस्टम के खिलाफ लड़नेवाले कॉकरोचों को माओवादी और नक्सलवादी करार देकर गोलियां मार दी गईं, फिर भी कॉकरोचों की तादाद बढ़ती ही जा रही है। कॉकरोचों के बीच धर्म, जाति और लिंग भेद का कितना भी जहर बो दिया जाए, ये कॉकरोच मरते नहीं हैं। देश की इस नई कॉकरोच पार्टी ने उन तमाम लोगों को एक ‘मंच’ दिया है जिनकी डिग्रियां अलमारियों में धूल खा रही हैं, जिनकी प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक हो रहे हैं, जिनकी नौकरियों के अवसर इंटरव्यू से पहले ही बेच दिए जाते हैं, जिनके हक और अधिकारों का मजाक उड़ाया जाता है, और जिन्हें वैचारिक रूप से पंगु या अंधभक्त बना दिया गया है। इन सभी ‘कॉकरोचों’ को कॉकरोच जनता पार्टी में पनाह मिली है। इस भ्रष्ट न्याय व्यवस्था, शासन तंत्र और चुनाव आयोग की लाचारी को अब इन कॉकरोचों के आक्रोश का सामना करना पड़ेगा। कॉकरोच जनता पार्टी की विजय हो! देश में कॉकरोचों का विद्रोह शुरू हो चुका है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, आपका बहुत-बहुत धन्यवाद!
