-५,२३३ लोगों की हुई मौत
द्रुप्ति झा / मुंबई
सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों के मामले में भारत विश्व में पहले स्थान पर है। भारत में सड़क हादसों में हर दिन औसतन ५४६ लोगों की जान जाती है, इनमें से दो-तिहाई मृतक १८ से ४५ वर्ष की उम्र के होते हैं। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय तथा ‘सेव लाइफ फाउंडेशन’ द्वारा जारी एक संयुक्त सर्वेक्षण में देश की उन सड़कों की पहचान की, जहां हादसों में मृत्यु का प्रमाण सबसे अधिक है। इस रिपोर्ट में महाराष्ट्र पहले स्थान पर है, जहां मौत का हाईवे बनीं सड़कें राज्य के ‘विकास’ की पोल खोल रही हैं।
राज्य में सड़क दुर्घटनाओं में मौतों का सिलसिला लगातार जारी है, जिससे कई परिवारों की खुशियां मातम में बदल रही हैं। हाल ही में पालघर के मुंबई-अमदाबाद नेशनल हाईवे पर एक भीषण हादसे में १३ लोगों की दर्दनाक मौत हो गई, जबकि २० से अधिक लोग घायल हुए थे। इसके अलावा, सातारा और छत्रपति संभाजीनगर में भी हाल ही में हुए सड़क हादसों में महिलाओं और बच्चों समेत कई लोगों ने अपनी जान गंवाई थी। रिपोर्ट में दोपहिया वाहन चालकों की मौतें सबसे अधिक दर्ज की गईं हैं।
सरकार के दावे निकले खोखले
यातायात नियमों के उल्लंघन और लापरवाही के कारण हो रहे इन हादसों को रोकने के लिए राज्य सरकार सख्त कदम उठाने का दावा तो करती है लेकिन जमीनी स्तर पर देखा जाए तो इतने प्रयासों के बाद भी सड़क दुर्घटनाएं कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। महाराष्ट्र में सबसे ज्यादा सड़क हादसों का मुख्य कारण तेज रफ्तार और खराब गुणवत्ता वाली सड़कें हैं।
२.६४ लाख मामले दर्ज
इस वर्ष जनवरी से अप्रैल के बीच, अधिकारियों ने हेलमेट के बिना वाहन चलाने के लिए २.६४ लाख से अधिक वाहन चालकों पर मामला दर्ज किया और ओवर-स्पीडिंग के २२,००० से अधिक मामले दर्ज किए। हजारों चालकों को बिना बीमा वाले वाहन चलाने, वैध पीयूसी प्रमाणपत्र न होने और सीट बेल्ट नियमों का उल्लंघन करने के लिए भी जुर्माना लगाया गया।
सामने आए डरावने आंक़ड़े
महाराष्ट्र में जनवरी से अप्रैल २०२६ के बीच सड़क दुर्घटनाओं और इनमें होने वाली मौतों के आंकड़े सामने आए हैं। २०२६ के पहले चार महीनों में १२,३८९ दुर्घटनाएं और ५,२३३ मौतें दर्ज की गई हैं। परिवहन विभाग ने २०३० तक सड़क दुर्घटनाओं को ५० फीसदी कम करने का लक्ष्य रखा है। इसके तहत, रडार और इंटरसेप्टर वाहनों से लैस ३३२ विशेष दस्ते राज्यभर में कार्यरत हैं। हेलमेट-सीट बेल्ट के उल्लंघन पर नकेल कसने के लिए एआई और रडार आधारित प्रणालियों का भी उपयोग किया जा रहा है।
