-अब कुकी और नागा समुदायों में टकराव
यूएजी
मणिपुर जातीय आग को शांत बताने वाली मोदी सरकार एक बार फिर सवालों के घेरे में है। जातीय हिंसा के बीच अब कुकी और नागा समुदायों के बीच तनाव और गहरा गया है। चर्च नेताओं की हत्या, उसके बाद हुए अपहरण और राष्ट्रीय राजमार्गों पर लगाए गए आर्थिक नाकेबंदी ने राज्य की स्थिति को और गंभीर बना दिया है। तनाव की शुरुआत १३ मई को हुई, जब नोनी जिले के कोटजिन-कोटलेन इलाके और जौजांगटेक गांव के पास अज्ञात हथियारबंद हमलावरों ने घात लगाकर हमला किया। इस हमले में तीन चर्च नेताओं और एक नागरिक की मौत हो गई। घटना के बाद कुकी और नागा समुदायों से जुड़े सशस्त्र समूहों के बीच आरोप-प्रत्यारोप और अपहरण की घटनाएं शुरू हो गईं।
अधिकारियों के मुताबिक उसी दिन कांगपोकपी और सेनापति जिलों से ३८ से ज्यादा लोगों का अपहरण किया गया। इनमें कुकी और लियांगमाई नागा समुदाय के लोग शामिल थे। प्रशासन ने बताया कि अब तक ३१ लोगों को रिहा किया जा चुका है। इनमें कोंसाखुल गांव की १२ नागा महिलाएं, कांगपोकपी जिले के १६ कुकी नागरिक और दो सेल्सियन ब्रदर्स शामिल हैं। हालांकि, छह नागा पुरुष अब भी लापता हैं और उनके बंधक बनाए जाने की आशंका जताई जा रही है। वहीं कुकी इंपी मणिपुर, जो राज्य के कुकी जनजातियों का शीर्ष संगठन है, ने दावा किया है कि १४ कुकी नागरिक अब भी नागा समूहों की हिरासत में हैं।
पहाड़ी जिलों में तनाव
दोनों समुदायों के नागरिक संगठनों ने सभी बंधकों को ‘जिंदा या मृत’ तुरंत रिहा करने की मांग की है और सशस्त्र समूहों से उन्हें प्रशासन तथा परिवारों को सौंपने की अपील की है। इन घटनाओं के बाद मणिपुर के पहाड़ी जिलों में तनाव और बढ़ गया है। इसके चलते राज्य के प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्गों पर आर्थिक नाकेबंदी और यातायात बाधित हो गया है। कुकी इंपी मणिपुर ने अपहरण और हमले के विरोध में राष्ट्रीय राजमार्गों पर पूर्ण बंद का एलान किया। इसके जवाब में यूनाइटेड नागा काउंसिल ने १७ मई से अंतर-जिला आर्थिक नाकेबंदी शुरू कर दी।
