मुख्यपृष्ठसमाचारमेट्रो सेवाओं की नाकामी सुरक्षा और जवाबदेही पर गंभीर सवाल

मेट्रो सेवाओं की नाकामी सुरक्षा और जवाबदेही पर गंभीर सवाल

सामना संवाददाता / मुंबई

-अत्याधुनिक ढांचा खड़ा कर देना पर्याप्त नहीं
इन दोनों घटनाओं से साफ है कि केवल अत्याधुनिक ढांचा खड़ा कर देना पर्याप्त नहीं है। मेट्रो जैसी सेवाओं में बैकअप बिजली व्यवस्था, आपातकालीन निकासी योजना, रियल टाइम सूचना प्रणाली और प्रशिक्षित कर्मचारियों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। मुंबई हो या गुरुग्राम, यात्रियों की सुरक्षा किसी भी तकनीकी या प्रशासनिक बहाने से ऊपर होनी चाहिए। अब जरूरत है कि ऐसी घटनाओं की उच्च स्तर पर जांच हो और जिम्मेदारी केवल फाइलों में नहीं, प्रत्यक्ष कार्रवाई के रूप में तय हो।

मुंबई और गुरुग्राम की मेट्रो सेवाओं से जुड़ी हालिया घटनाओं ने शहरी परिवहन व्यवस्था की चमकदार तस्वीर के पीछे छिपी गंभीर कमजोरियों को उजागर कर दिया है। मुंबई मेट्रो-३ में तकनीकी गड़बड़ी के बाद यात्रियों में केवल असुविधा को लेकर नाराजगी नहीं है, बल्कि अब सुरक्षा, आपातकालीन व्यवस्था और जवाबदेही को लेकर तीखे सवाल उठने लगे हैं। यात्रियों और नागरिक संगठनों की ओर से मांग की जा रही है कि मुंबई मेट्रो ऑपरेशन कॉर्पोरेशन लिमिटेड यानी एमएमओसीएल में जिम्मेदार अधिकारियों की स्पष्ट जवाबदेही तय की जाए।
यात्रियों का कहना है कि मेट्रो-३ जैसा पूरी तरह भूमिगत मार्ग किसी सामान्य लोकल सेवा की तरह नहीं देखा जा सकता। भूमिगत मार्ग में सेवा ठप होना केवल ‘तकनीकी समस्या’ नहीं, बल्कि संभावित सुरक्षा संकट भी है। ऐसे में यह सवाल स्वाभाविक है कि आपातकालीन स्थिति में यात्रियों से संवाद कौन करेगा, सुरक्षा प्रोटोकॉल कितने प्रभावी हैं और निर्णय लेने वाला अधिकारी कौन है। ऑनलाइन टिकटधारकों को रिफंड न मिलना, समय पर सूचना न देना और कर्मचारियों के व्यवहार से जुड़ी शिकायतों ने यात्रियों के आक्रोश को और बढ़ा दिया है। इसी बीच गुरुग्राम में बिजली संकट ने रैपिड मेट्रो की व्यवस्था को हिला दिया।

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