मुख्यपृष्ठस्तंभमुस्लिम वर्ल्ड: अरब देशों पर ट्रंप का ईरान को फ्री हैंड?

मुस्लिम वर्ल्ड: अरब देशों पर ट्रंप का ईरान को फ्री हैंड?

सूफी खान

-हम थे जिनके सहारे, वो हुए न हमारे!

जिन अरब देशों ने अमेरिका को ईरान पर हमले के लिए अपनी जमीन दी। जिनके बेस से अमेरिकी फाइटर जेट आयतुल्लाह अली खामेनेई के घर पर बम बरसाने उड़े थे और जिन पर ईरान ने तगड़ा पलटवार भी किया और अब भी कर रहा है। उन पर हमले के लिए अब ट्रंप ने ईरान को फ्री हैंड दे दिया है। दरअसल, प्रेसिडेंट ट्रंप के इशारों से तो कुछ ऐसा ही लग रहा है।
इससे पहले उन्होंने कहा था कि इजरायल के पीएम नेतन्याहू एहसानफरामोश हैं। ट्रंप ना होते तो ईरान, इजरायल का नामोनिशान मिटा देता। फिर ये भी कहा कि ईरान के सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई से मिलना मेरा सौभाग्य होगा। अब जो बात मीडिया रिपोर्ट के हवाले से सामने आती हैं वो ये कि ट्रंप इशारा दे रहे हैं कि वो ईरान और अरब देशों के पचड़े में ही नहीं पड़ेगें। क्या ईरान को डील के लिए मनाने के चक्कर में अमेरिका सहयोगी अरब देशों को मंझधार में छोड़ रहा है? ये बड़ा सवाल है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया है कि वे ईरान के साथ फिर से बड़े स्तर का युद्ध शुरू नहीं करना चाहते। हालांकि, अगर ईरान की कार्रवाई में अमेरिकी सैनिकों को नुकसान होगा तो फिर देखेंगे। गौरतलब है कि हाल ही में ईरान ने कुवैत और बहरीन पर ड्रोन मारे हैं। इससे पहले यूएई के अल फुजैरह पोर्ट के करीब भी ईरान ने अटैक किया था। सोशल मीडिया पर चर्चा है कि ट्रंप की बातों से तो यही लगता है कि कुवैत या यूएई, जिसे चाहो मारो हमें मतलब नहीं।
ऐसा लगता है कि ट्रंप ने ईरान को इशारों-इशारों में उसकी रेड लाइन समझा दी है। बाकी अपना मामला खुद सुलझाने के लिए इशारे दे दिए हैं। सच्चाई तो ये है कि बिना अमेरिकी मदद के इन देशों के पास इतनी ताकत है ही नहीं कि ईरान पर पलटवार कर सकें। यह दावा अमेरिकी अखबार वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट में किया गया है।
रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप मिडिल ईस्ट में एक और बड़े युद्ध से बचना चाहते हैं। इसलिए वह छोटे-मोटे हमलों और तनाव को कुछ समय तक सहने के लिए तैयार हैं। इस रिपोर्ट के मायने समझे जाएं तो एक तर्क ये भी बनता है कि इजरायल के लिए खड़ा रहने वाला अमेरिका अरब और मुस्लिम देशों को अक्सर यूं ही छोड़ देता है। अब ट्रंप के ये इशारे की रेड लाइन के भीतर से जिसे चाहो मारो पर अमेरिकी सैनिकों को नुकसान हुआ तो जवाब देंगे, बहुत कुछ समझा जाते हैं। ताजा इशारे अरब देशों के लिए न सिर्फ सदमा हैं, बल्कि बड़ी सीख भी।

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