श्रीकिशोर शाही
(बुंगा बुंगा-५)
पुलिस स्टेशन से पीएम ने जिस नाबालिग लड़की को छोड़ने को कहा था, उसका नाम गुप्त संसार में ‘रूबी द हार्टस्टीलर’ था। इसलिए बाद में इसे ‘रूबी गेट’ कहा गया। ‘रूबी गेट’ के उस धमाके ने इटली की राजनीति को भले ही हिलाकर रख दिया था, लेकिन पीएम सिल्वियो बर्लुस्कोनी हमेशा से इतने ताकतवर और रसूखदार राजनेता नहीं थे। सत्ता, दौलत और ‘बुंगा बुंगा’ की उन अय्याश रातों से बहुत दूर, इस कहानी की शुरुआत इटली के मिलान शहर की कुछ मामूली सी सड़कों से होती है।
बात १९५० और ६० के दशक की है। तब सिल्वियो कोई अरबपति नहीं, बल्कि बड़े-बड़े सपने देखने वाला एक साधारण सा नौजवान था, जिसकी जेबें तो खाली थीं, लेकिन आंखों में पूरी दुनिया को मुट्ठी में करने की एक अजीब सी चमक थी। अपने शुरुआती दिनों में सिल्वियो ने कानून की पढ़ाई जरूर की, लेकिन उनका असली हुनर किताबों में नहीं, बल्कि लोगों को अपनी बातों से सम्मोहित करने में छिपा था। पैसा कमाने की भूख ने उन्हें भूमध्य सागर की लहरों पर तैरते उन आलीशान क्रूज जहाजों पर पहुंचा दिया, जहां अमीर पर्यटक छुट्टियां मनाने आते थे। इन्हीं क्रूज जहाजों की रंगीन रातों में युवा सिल्वियो एक गायक और ‘एंटरटेनर’ के रूप में काम करते थे। एक हाथ में माइक और होठों पर वह जादुई मुस्कान, जिसने आगे चलकर पूरे इटली को अपना दीवाना बना लिया था।
वह महज गाने नहीं गा रहे थे, वह असल में इंसान के दिमाग को पढ़ने और उसे अपने चार्म के जाल में फंसाने की कला सीख रहे थे। सिल्वियो ने जल्दी ही यह समझ लिया था कि अगर आप लोगों को एक खूबसूरत सपना बेच सकते हैं, तो वे आपकी हर बात मान लेंगे। क्रूज पर गाना गाने से लेकर घर-घर जाकर वैक्यूम क्लीनर बेचने तक, सिल्वियो ने खुद को एक ऐसे बेजोड़ ‘सेल्समैन’ के रूप में ढाल लिया था, जो मिट्टी को भी सोने के भाव बेच सकता था।
यही वह दौर था जब सिल्वियो ने अपनी उस सम्मोहक कला को तराशा, जो आगे चलकर उनका सबसे खतरनाक हथियार बनने वाली थी। समुद्र की लहरों पर गीत गुनगुनाने वाले उस मामूली से गायक को अब अपनी मंजिल साफ दिखने लगी थी। उसे अब इटली की जमीन पर एक ऐसा साम्राज्य खड़ा करना था, जिसकी कल्पना तक उस समय किसी ने नहीं की थी और जिसकी शुरुआत कंक्रीट और ईंटों से होने वाली थी। (शेष अगले अंक में)
