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बेस्ट की कातिल बसें!

द्रुप्ति झा / मुंबई

-मालाड-पूर्व में बेस्ट बस की टक्कर से कैब चालक की मौत

-दो वर्षों में बेस्ट हादसों में ४० लोगों की मौत

मुंबई की सड़कों पर दौड़ती बेस्ट बसें अब आम नागरिकों के लिए सुविधा से ज्यादा भय का कारण बनती जा रही हैं। पिछले दो वर्षों में ४० से अधिक लोगों की जान लेने वाले बेस्ट हादसों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। गुरुवार को मालाड ईस्ट में एक और दर्दनाक हादसे में ५० वर्षीय वैâब चालक की जान चली गई। लगातार हो रही दुर्घटनाओं ने बेस्ट की सुरक्षा व्यवस्था, चालक प्रशिक्षण और वेट-लीज मॉडल पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हर हादसे के बाद जांच और सुधार के दावे किए जाते हैं, लेकिन सड़कों पर मौत का यह सफर जारी है। आखिर इन हादसों के लिए जिम्मेदार कौन है और कब रुकेगा यह खूनी सिलसिला?
गुरुवार सुबह मालाड ईस्ट में बेस्ट की एक बस ने एक खड़ी गाड़ी को टक्कर मार दी, जिससे ५० वर्षीय वैâब चालक की मौत हो गई। पुलिस के अनुसार, मृतक रामचंद्र निरहु पाल अपनी ओला कैब के पीछे खड़े होकर वाहन की सफाई कर रहे थे। तभी सुबह करीब ६:५० बजे पुष्पा पार्क के पास यह दुर्घटना हुई। घटना के बाद उन्हें शताब्दी अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। अधिकारियों के मुताबिक, टक्कर में उन्हें गंभीर चोटें आई थीं।
हाल ही में वडाला डिपो जा रही एक बेस्ट बस एक खड़ी बस से टकरा गई, जिसके बाद केबिन दूसरी खड़ी गाड़ी से जा भिड़ा। इस दुर्घटना से वाहनों को नुकसान पहुंचा और सुबह के व्यस्त समय में वेस्टर्न एक्सप्रेस हाईवे पर लंबा जाम लग गया। हालांकि पुलिस और प्रशासन की तत्परता से यातायात बाद में सामान्य हो सका।
इससे भी अधिक दर्दनाक घटना कुछ दिन पहले मालाड में हुई थी, जहां नौ वर्षीय एक बच्चे की बेस्ट बस की चपेट में आने से मौत हो गई थी। मई में अंधेरी पश्चिम के अंबोली नाका के पास चार बसों की टक्कर में एक ५२ वर्षीय कंडक्टर की भी मौत हो गई थी। बेस्ट के आंकड़ों के अनुसार, पिछले दो वर्षों में ४० से अधिक लोगों की जान बस हादसों में जा चुकी है। लगातार बढ़ते हादसों को देखते हुए बेस्ट समिति ने चालक प्रशिक्षण और सुरक्षा मानकों पर चिंता जताई है।

वेट-लीज बसें बनीं चिंता का कारण
बेस्ट के २,७९२ बसों के बेड़े में केवल २४९ बसें ही स्वामित्व वाली हैं, जबकि अधिकांश बसें वेट-लीज मॉडल पर संचालित होती हैं। कई हादसों में इन बसों की भूमिका सामने आने के बाद चालक प्रशिक्षण और निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं। प्रशासन ने अब चार सप्ताह का अनिवार्य प्रशिक्षण लागू किया है।

बेस्ट हादसों का डरावना आंकड़ा
बेस्ट के आंकड़ों के अनुसार पिछले दो वर्षों में बस हादसों में ४० से अधिक लोगों की जान जा चुकी है। हाल के महीनों में मालाड, अंधेरी और वडाला में हुई दुर्घटनाओं ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। लगातार बढ़ रही मौतों से यात्रियों और नागरिकों में भय का माहौल है।

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