एड. कनई बिस्वास
वैवाहिक रिश्ते में महिला को मानसिक, शारीरिक या आर्थिक रूप से प्रताड़ित किया जाता है तो कानून सख्त हो जाता है। भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा ८५, ८६ और ८७ विवाहित महिला के साथ क्रूरता, क्रूरता की परिभाषा और महिला के अपहरण या जबरन विवाह से जुड़े अपराधों को स्पष्ट करती हैं।
केस स्टडी- १: ‘पति या रिश्तेदार द्वारा क्रूरता’ (धारा ८५)
एक विवाहिता को पति और ससुराल पक्ष ने लगातार दहेज के लिए प्रताड़ित किया। मानसिक रूप से परेशान कर घर से निकालने की धमकी दी गई।
अदालत क्या देखेगी?
क्या महिला को पति या उसके रिश्तेदारों ने प्रताड़ित किया? क्या प्रताड़ना जानबूझकर और लगातार की गई? क्या इसका संबंध दहेज या अवैध मांग से था?
फैसला: यह पति या रिश्तेदार द्वारा क्रूरता का मामला है। समझें: धारा ८५ के तहत यदि पति या उसके रिश्तेदार महिला के साथ क्रूरता करते हैं तो तीन वर्ष तक का कारावास और जुर्माने का प्रावधान है।
केस स्टडी- २: ‘क्रूरता की परिभाषा’ (धारा ८६)
एक महिला को उसके ससुराल में लगातार अपमानित किया गया, दहेज के लिए दबाव बनाया गया और ऐसी स्थिति पैदा की गई, जिससे उसके मानसिक स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ा।
अदालत क्या देखेगी?
क्या व्यवहार ऐसा था, जिससे महिला आत्महत्या के लिए विवश हो सकती थी? क्या उसके जीवन, अंग या मानसिक-शारीरिक स्वास्थ्य को गंभीर खतरा था? क्या दहेज या संपत्ति की मांग के लिए उत्पीड़न किया गया?
फैसला: यह क्रूरता की श्रेणी में आ सकता है। समझें: धारा ८६ बताती है कि क्रूरता में ऐसा आचरण शामिल है, जो महिला को आत्महत्या के लिए प्रेरित कर सकता हो या उसके जीवन, स्वास्थ्य अथवा सम्मान को गंभीर नुकसान पहुंचाता हो।
केस स्टडी- ३: ‘महिला का अपहरण या जबरन विवाह’ (धारा ८७)
एक व्यक्ति ने एक महिला को बहला-फुसलाकर घर से दूर ले गया और उस पर विवाह करने का दबाव बनाया।
अदालत क्या देखेगी?
क्या महिला को उसकी इच्छा के विरुद्ध ले जाया गया? क्या विवाह या अवैध संबंध के लिए दबाव बनाया गया? क्या बहला-फुसलाकर या बलपूर्वक उसे हटाया गया?
फैसला: यह महिला के अपहरण या जबरन विवाह से जुड़ा अपराध है। समझें: धारा ८७ के तहत किसी महिला को विवाह के लिए मजबूर करने, अवैध संबंध के उद्देश्य से ले जाने या बहकाने पर सजा का प्रावधान है।
भारतीय न्याय संहिता यह स्पष्ट करती है कि विवाह के भीतर महिला पर अत्याचार निजी मामला नहीं, बल्कि गंभीर अपराध है। क्रूरता केवल मारपीट तक सीमित नहीं है, बल्कि मानसिक उत्पीड़न, दहेज के लिए दबाव और सम्मान को चोट पहुंचाने वाला व्यवहार भी इसमें शामिल हो सकता है। यानी, महिला की गरिमा और सुरक्षा कानून की नजर में सर्वोपरि है।
(अगले अंक में: धारा ८८, ८९ और ९० – ‘गर्भपात, गर्भस्थ शिशु और जन्म से जुड़े अपराध’ को आसान उदाहरणों के साथ समझेंगे।)
