ईश्वरी राज
यूपी की राजधानी लखनऊ में इन दिनों ‘बुलडोजर बाबा’ के दरबार में सन्नाटा है, पर पर्दे के पीछे हलचल तेज है। सुना है दिल्ली के ‘चाणक्य’ ने २०२७ के लिए टिकटों की नई लिस्ट बनानी शुरू कर दी है। इसी लिस्ट की एक कॉपी पटना पहुंच गई, क्योंकि ‘पलटीमार चाचा’ को साधे बिना यूपी-बिहार का समीकरण बनता नहीं। चाचा फिलहाल मौन हैं, लेकिन ‘लालटेन वाले युवराज’ और ‘कमल के रणनीतिकार’ दोनों ही उनके दरवाजे पर हाजिरी लगा रहे हैं। चाचा की नजर यूपी के समीकरण पर है और यूपी के बाबा की नजर बिहार के कुर्मी-कोइरी वोट पर। ये गठजोड़ देहरादून तक गया है।
पहाड़ का रास्ता
उत्तराखंड में ‘धाकड़ धामी’ और ‘पुराने महाराज’ के बीच ठंडी जंग अब ‘चारधाम बनाम विकास’ की बहस में बदल गई है। चर्चा है कि महाराज को बिहारवाले चाचा का फोन आया था, ‘पहाड़ का रास्ता मैदान से होकर जाता है’। यानी उत्तराखंड का मसला सुलझाना है तो पटना से हरी झंडी जरूरी है। इसी बीच राजस्थान से खबर है कि ‘जादूगर’ ने पहाड़ों में अपने एक खास चेले को भेजा है। जादूगर को लगता है कि अगर उत्तराखंड में समीकरण बदला तो उसका असर सीधा जयपुर पर पड़ेगा।
मामा को फोन…!
जयपुर में ‘राजकुमारी’ और दिल्ली दरबार के बीच संदेशों का आदान-प्रदान बढ़ गया है। ‘जादूगर’ की सक्रियता देखकर राजकुमारी ने भोपाल में ‘मामा’ को फोन घुमा दिया। एमपी के मामा इन दिनों खुद ‘सिंधिया किले’ और ‘कमलनाथ की पौध’ के बीच संतुलन साध रहे हैं। मामा का फॉर्मूला साफ है, राजस्थान में राजकुमारी मजबूत होगी तो एमपी में सिंधिया खेमा शांत रहेगा।
कुंडली
भोपाल से एक पर्चा सीधा लखनऊ पहुंचा है। उस पर्चे में लिखा है- ‘पांचों राज्यों की कुंडली एक है। यूपी संभला तो बिहार, बिहार संभला तो उत्तराखंड, उत्तराखंड से राजस्थान, और राजस्थान से एमपी और एमपी की हवा का रुख फिर यूपी तय करेगा।’
वेट एंड वॉच
तो कुल मिलाकर पांचों राज्यों की सियासत एक गोल चक्कर बन गई है। यहां हर चेहरा दूसरे राज्य की कुर्सी से बंधा है। बुलडोजर बाबा चाचा को देख रहे हैं, चाचा धामी को, धामी जादूगर को, जादूगर राजकुमारी को, राजकुमारी मामा को, और मामा फिर बाबा को। सियासी गोटियां बिछ चुकी हैं, अब बस कोई एक गोटी हिली नहीं कि पूरा खेल पलट जाए। फिलहाल, सब ‘वेट एंड वॉच’ के मोड में हैं।
