सामना संवाददाता / मुंबई
अशोक चव्हाण की बढ़ी बेचैनी
महाराष्ट्र विधान परिषद चुनाव से पहले नांदेड़ में महायुति की एकता पर सवाल खड़े हो गए हैं। भाजपा सांसद अशोक चव्हाण और दादा गुट के विधायक प्रताप पाटील चिखलीकर ने संयुक्त प्रेस कोन्फ्रेंस कर महायुति धर्म निभाने का दावा किया, लेकिन इस कार्यक्रम से शिंदे गुट की पूरी गैरमौजूदगी ने राजनीतिक गलियारों में नई चर्चा छेड़ दी है।
नांदेड़ स्थानीय प्राधिकरण निर्वाचन क्षेत्र में भाजपा उम्मीदवार अमर राजूकर के समर्थन में आयोजित इस प्रेस कोन्फ्रेंस में महायुति के दो घटक दलों के नेता तो मौजूद रहे, लेकिन शिंदे गुट का एक भी प्रतिनिधि नजर नहीं आया। इससे यह संदेश गया कि शिंदे गुट ने भाजपा और दादा गुट को गच्चा दे दिया है और वह इन दोनों के साथ पूरी तरह सहज नहीं है।
महायुति की एकजुटता दिखाने के लिए आयोजित कार्यक्रम उल्टा भाजपा के लिए असहज स्थिति पैदा कर गया। अशोक चव्हाण और प्रताप पाटील चिखलीकर भले ही सब कुछ सामान्य बताने की कोशिश करते रहे हों, लेकिन शिंदे खेमे की खाली कुर्सियां गठबंधन के भीतर मौजूद खटास की कहानी बयां करती रहीं थी। स्थिति को संभालने के लिए प्रताप पाटील चिखलीकर को सार्वजनिक रूप से यह स्वीकार करना पड़ा कि शिंदे गुट को निमंत्रण नहीं दिया जाना उनकी गलती थी। हालांकि उन्होंने दावा किया कि शिंदे गुट महायुति के साथ है, लेकिन उनकी सफाई ने ही इस विवाद को और हवा दे दी। दादा गुट की ओर से यह सीट मांगने के बाद भी नहीं मिली। यहां से प्रवीण चिखलीकर ने निर्दलीय पर्चा भरा जिसे बाद में वापस ले लिया है।
