मनमोहन सिंह
हिंदुस्थान में डेटा सुरक्षा सबसे गंभीर प्रश्न बनकर उभरी है। सरकारी पोर्टल्स की साइबर सुरक्षा और नागरिकों के डेटा प्रोटेक्शन को लेकर सरकार पहले भी कई बार कटघरे में खड़ी रही है। इसी कड़ी में, देश की सबसे प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षाओं में से एक, JEE (Advanced) २०२६ के अभ्यर्थियों का डेटा लीक होने के बाद देश का राजनीतिक और सामाजिक तापमान बढ़ गया है। रिजल्ट पोर्टल के क्लाउड स्टोरेज में एक गंभीर तकनीकी खामी (कॉन्फिग्यूरेशन इश्यू) के कारण लगभग दो लाख छात्रों की संवेदनशील जानकारी सार्वजनिक हो गई। इस डिजिटल सुरक्षा चूक को लेकर नवनिर्मित कॉकरोच जनता पार्टी ने केंद्र सरकार और शिक्षा मंत्रालय के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।
सक्षम हाथों में नहीं है देश का डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर
गुरुवार, ४ जून को नई दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब ऑफ इंडिया में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कॉकरोच जनता पार्टी नेताओं ने सरकार की डिजिटल नीतियों और साइबर सुरक्षा के दावों पर कड़े सवाल उठाए। सोशल मीडिया से शुरू हुए इस अभियान ने अब एक बड़े जन-आंदोलन का रूप ले लिया है। आईआईटी कानपुर और लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स के पूर्व छात्र तथा ण्व्झ् के नवनियुक्त प्रवक्ता आशुतोष रांका ने मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि इस लापरवाही के कारण लगभग दो लाख छात्रों के नाम, फोन नंबर और तस्वीरें उजागर हो गई हैं। यह बेहद शर्मनाक है कि जिस देश के टेक विशेषज्ञ दुनिया की दिग्गज कंपनियों को चला रहे हैं, वहां का शिक्षा मंत्रालय और सरकार एक बुनियादी रिजल्ट पोर्टल को सुरक्षित रखने में भी पूरी तरह अक्षम साबित हुए हैं।
पुरानी डेटा लीक घटनाओं ने फिर बढ़ाई चिंता
यह पहली बार नहीं है जब देश में नागरिकों या छात्रों के डेटा की सुरक्षा को लेकर सरकारी सिस्टम पर सवाल उठे हैं।
शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर अड़ी कॉकरोच जनता पार्टी
पार्टी ने इस पूरे घटनाक्रम के लिए सीधे तौर पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को जिम्मेदार ठहराया है। ण्व्झ् नेताओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अपील की है कि शिक्षा क्षेत्र में जवाबदेही तय करने में नाकाम रहे शिक्षा मंत्री को तुरंत उनके पद से बर्खास्त किया जाए। पार्टी का कहना है कि यह केवल एक तकनीकी खराबी नहीं, बल्कि देश के लाखों छात्रों के भविष्य और उनकी गोपनीयता के साथ खिलवाड़ है। गौरतलब है कि इस मांग को सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक का भी समर्थन मिला है, जिन्होंने चेतावनी दी है कि यदि शिक्षा मंत्री का इस्तीफा नहीं होता है, तो वे भी इस आंदोलन में शामिल होंगे।
६ जून को देशव्यापी आंदोलन: शांति की अपील
विपक्ष और सरकार के साथ बातचीत के रास्ते खुले रखने का दावा करते हुए ण्व्झ् ने आगामी ६ जून को एक बड़े विरोध प्रदर्शन का आह्वान किया है। हालांकि, इस आंदोलन के हिंसक होने की अटकलों को खारिज करते हुए आशुतोष रांका ने स्पष्ट किया कि पार्टी पूरी तरह से शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक मर्यादाओं के भीतर रहकर ही अपना विरोध दर्ज कराकर जवाबदेही तय करने की मांग करेगी।
लापरवाहियां
अतीत में भी ऐसे कई बड़े मामले सामने आ चुके हैं, जिन्होंने देश के डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर की कमियों को उजागर किया था। जैसे साल २०२२ में देश के सबसे बड़े चिकित्सा संस्थान एम्स दिल्ली के सर्वर्स पर एक बड़ा रैनसमवेयर हमला हुआ था, जिसने अस्पताल की डिजिटल सेवाओं को हफ्तों तक ठप कर दिया था और लाखों मरीजों के डेटा पर संकट खड़ा हो गया था। इसके बाद साल २०२३ में कोविड-१९ टीकाकरण के केंद्रीय पोर्टल कोविन (ण्देंघ्र्) से नागरिकों के आधार कार्ड, पासपोर्ट और फोन नंबर जैसी बेहद निजी जानकारियां लीक होने की खबरें आई थीं, जिसने देश भर में प्राइवेसी को लेकर बड़ा विवाद खड़ा किया था। इससे पहले साल २०१८ में कर्मचारी भविष्य निधि संगठन के आधार-सीडिंग पोर्टल में तकनीकी खामी के चलते करोड़ों नौकरीपेशा नागरिकों के पीएफ अकाउंट और डेमोग्राफिक डेटा के लीक होने की गंभीर आशंका सामने आई थी। इन पुरानी घटनाओं का हवाला देते हुए विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार बार-बार होने वाली इन चूकों से सबक लेने में नाकाम रही है और JEE २०२६ का हालिया मामला इसी लापरवाही की अगली कड़ी है।
