अनिल मिश्र / पटना
बिहार बाल भवन किलकारी के समर कैंप “चक धूम-धूम” के पांचवें दिन बच्चों ने कई विधा के साथ मूर्ति कला (स्कल्पचर) का प्रशिक्षण लेते रहे। प्रशिक्षण के दौरान प्रशिक्षक सुरेन्द्र प्रजापत और विजयान्त की देख रेख में बच्चों को मिट्टी से विभिन्न प्रकार की कलाकृतियां और मूर्तियां बनाने की तकनीक को जाना।बच्चों ने अपनी कल्पनाशक्ति का उपयोग करते हुए सुंदर आकृतियां तैयार कीं, जिसमें मिट्टी से सांप बनाना, गुड़िया बनाना, मोर, बत्तख, फोन, चूल्हा, खिलौना बनाना सीखा। इस गतिविधि में बच्चों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और अपनी रचनात्मक प्रतिभा का प्रदर्शन किया। बच्चों की कलाकृति को देखकर अभिभावक बहुत खुश हुए। प्रमंडल कार्यक्रम समन्वयक राजीव रंजन श्रीवास्तव ने बच्चों की कलाकृतियों को देखकर बताया कि मूर्तिकला बच्चों में एकाग्रता, धैर्य और सृजनात्मक सोच को विकसित करती है। बच्चों द्वारा बनाई गई कलाकृतियों की सभी ने सराहना की। सभी बच्चों ने आज गेम का भी आनंद उठाया। जिसमें खेल प्रशिक्षक अखिलेश्वर कुमार ने “रसना रेस” करवाया गया । बच्चों ने बड़े ही उत्साह के साथ गेम खेला । तीन सत्रों में चलने वाले इस समर कैंम्प मे शहर के विभिन्न इलाकों से आए हजारों बच्चों का बाल भवन मे जमावडा लगा रहता है। एक बच्चा कई कई विधा को सीखने मे लगा है।
बिहार बाल भवन किलकारी के समर कैंप में नृत्य, संगीत, पेंटिंग, नाटक, कराटे, कंप्यूटर, मूर्ति कला सहित कई विधाओं का निःशुल्क प्रशिक्षण दिया जा रहा है। बच्चों और अभिभावकों में कैंप को लेकर काफी उत्साह देखी जा रही है, लगातार समर कैंप में बच्चे जुड़ रहे हैं और अभी भी बच्चों का रजिस्ट्रेशन जारी है।
