सुनील ओसवाल / मुंबई
महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर बड़े फेरबदल की चर्चा जोरों पर है। दादा गुट की राज्यसभा की रिक्त सीट को लेकर चल रही कवायद अब नए राजनीतिक समीकरणों को जन्म देती दिखाई दे रही है। सूत्रों के अनुसार, वरिष्ठ नेता और मंत्री छगन भुजबल का नाम राज्यसभा के लिए सबसे मजबूत दावेदारों में माना जा रहा है। यदि भुजबल दिल्ली की राजनीति में कदम रखते हैं तो महाराष्ट्र मंत्रिमंडल में उनकी जगह किसे मिलेगी, इसे लेकर भी चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है। चर्चा है कि भुजबल की जगह उनके पुत्र को राज्य मंत्रिमंडल में मंत्री बनाया जाएगा।
चर्चा के अनुसार, भुजबल के राज्यसभा जाने का रास्ता साफ होते ही उनके पुत्र और पूर्व सांसद समीर भुजबल को मंत्रिमंडल में शामिल किया जा सकता है। इसे लेकर पार्टी के शीर्ष स्तर पर मंथन चलने की जानकारी सामने आ रही है। हालांकि, आधिकारिक तौर पर कोई पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन दादा गुट में इस संभावित बदलाव को लेकर गतिविधियां तेज हो गर्इं बताई जा रही हैं। दरअसल, उप मुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार द्वारा राज्यसभा सदस्यता छोड़ने के बाद यह सीट रिक्त हुई है। बताया जा रहा है कि पार्टी नेतृत्व चाहता है कि यह सीट किसी ऐसे वरिष्ठ नेता को मिले, जिसका संगठन और सरकार दोनों में प्रभाव हो।
एक तीर से कई निशाने
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि यह फॉर्मूला लागू होता है तो एक तीर से कई निशाने साधे जा सकते हैं। एक ओर छगन भुजबल को राष्ट्रीय राजनीति में नई भूमिका मिलेगी, दूसरी ओर राज्य में भुजबल परिवार का प्रतिनिधित्व भी कायम रहेगा। यही वजह है कि इस संभावित बदलाव को एनसीपी के भीतर ‘पावर शिफ्ट’ के तौर पर देखा जा रहा है।
