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हादसे के इंतजार में मुंबई…फायर सेफ्टी नियमों का उल्लंघन… ३०० अस्पतालों को नोटिस!.. १० प्रतिशत पर भी नहीं हुआ एक्शन… गहरी नींद में सोया है मनपा प्रशासन

द्रुप्ति झा / मुंबई

दिल्ली के होटल में आग की घटना में २२ लोगों की मौत और उसके बाद बिहार के अस्पताल की आगजनी में ५ लोगों के जिंदा जलने जैसी घटना मुंबई शहर में भी हो सकती है। यहां कोने-कोने में बिना मनपा की फायर सेफ्टी गाइडलाइन के ही खुल रहे अस्पताल, होटल्स, रेस्टारेंट, आदि लोगों के लिए सुविधा कम जानलेवा ज्यादा साबित हो रहे हैं। भांडुप और घाटकोपर के अस्पतालों में ऐसे हादसों में मासूमों की जानें जा चुकी हैं। फिर भी प्रशासन गहरी नींद में है। पता चला है कि हालिया कुछ महीनों में ३०० अस्पतालों को नोटिस दिया गया है, पर इनमें १० फीसदी पर भी एक्शन नहीं हुआ है।
इमरजेंसी एग्जिट पर कबाड़
अंधेरी, भांडुप, घाटकोपर, कुर्ला, गोवंडी, और धारावी जैसे इलाकों के रिहायशी परिसरों और कमर्शियल मॉल्स में चल रहे अस्पतालों का रियलिटी चेक करने पर चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। कई अस्पतालों में इमरजेंसी एग्जिट के आगे कबाड़ भरा है या उन पर ताले लटके मिले। आईसीयू और वॉर्ड्स में लगे स्मोक डिटेक्टर और स्प्रिंकलर सिस्टम सालों से मेंटेन नहीं किए गए हैं। मानखुर्द-गोवंडी और धारावी की झोपड़पट्टियों वाले इलाकों में स्थित नर्सिंग होम तक जाने वाली गलियां इतनी संकरी हैं कि वहां फायर ब्रिगेड की गाड़ी का पहुंचना नामुमकिन है।
मुंबई के अस्पताल इलाज के केंद्र या ‘डेथ ट्रैप’!
मनपा और आरटीआई से मिले आंकड़ों के मुताबिक, पिछले दो वर्षों में मुंबई के कई अस्पतालों को फायर सेफ्टी नियमों के उल्लंघन के नोटिस थमाए गए। मगर अधिकांश पर कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं हुई। अब सवाल उठने लगे हैं कि क्या मुंबई के ये अस्पताल इलाज के केंद्र हैं या किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहे डेथ ट्रैप?
घाटकोपर में रहने वाले रमेश सावंत ने कहा, ‘मेरे पिता आईसीयू में हैं। यहां न तो कोई ढंग का एग्जिट है और न ही स्टाफ को आग बुझाने की ट्रेनिंग है। हम इलाज कराने आए हैं या अपनी जान गंवाने?’ हेल्थ राइट्स एक्टिविस्ट डॉ. अभय शुक्ला ने कहा, ‘भांडुप के मॉल अस्पताल की आग और घाटकोपर की त्रासदियों से कोई सबक नहीं लिया गया। जब तक दोषी अधिकारियों और अस्पताल मालिकों को जेल नहीं होगी, यह जानलेवा लापरवाही बंद नहीं होगी, तब तक नियमों का उल्लंघन जारी रहेगा।
शॉर्ट सर्किट प्रमुख कारण
एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि मुंबई में बढ़ती जनसंख्या के साथ-साथ तमाम अस्पताल-रेस्टोरेंट और होटल भी खुल रहे हैं। ऐसे में प्रशासन सख्त तो है लेकिन उसकी तुलना में फायर विभाग में रिक्त पदों के चलते तनाव में भी है। बताया कि ७०-८० प्रतिशत आग की घटनाओं के पीछे शॉर्ट सर्किट प्रमुख कारण पाया गया। निरीक्षण में बड़ी संख्या में इमारतों में खराब स्प्रिंकलर, निष्क्रिय स्मोक डिटेक्टर, बंद फायर एग्जिट और अवरुद्ध रिफ्यूज एरिया जैसी गंभीर खामियां मिलीं।

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