-हाई कोर्ट की तल्ख टिप्पणी, दिया स्थगनादेश
सामना संवाददाता / लखनऊ
गत सप्ताह यूपी के व्यावसायिक शिक्षा एवं कौशल विकास विभाग के एक सहायक निदेशक के बगैर जांच फर्जी शिकायत पर हुए निलंबन पर इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने रोक लगा दी है। साथ ही सरकार से जवाब तलब कर लिया है।
व्यावसायिक शिक्षा एवं कौशल विकास विभाग के अधिकारी सहायक निदेशक धीरेंद्र कुमार के निलंबन आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी है। माननीय न्यायमूर्ति सुधांशु चौहान की एकल पीठ ने राज्य सरकार के 27 मई 2026 के निलंबन आदेश को स्थगित करते हुए सरकार से जवाब तलब किया है।
बता दें कि, गत २७ मई को यूपी सरकार के व्यावसायिक शिक्षा और कौशल विकास विभाग में तैनात सहायक निदेशक (प्रशिक्षण) धीरेंद्र कुमार को शासन ने निलंबित कर दिया था। इस निलंबन के खिलाफ पीड़ित अफसर ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ में याचिका दायर की। मामले की याची की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता वीरेंद्र मिश्र ने कोर्ट में न्यायाधीश के समक्ष में कहा कि, यह निलंबन पूरी तरह फर्जी शिकायत पर आधारित है। व्यावसायिक शिक्षा और कौशल विकास विभाग ने बिना किसी प्राथमिक जांच किये महज ४८ घंटों के भीतर निलंबन की कार्रवाई कर दी। किसी भी सरकारी कर्मचारी के खिलाफ कार्रवाई करने से पहले शिकायत की सत्यता जांचना अनिवार्य है लेकिन इस मामले में संबंधित विभाग ने उत्तर प्रदेश सरकार के ही शासनादेशों की धज्जियां उड़ा दीं। बिना किसी सबूत के केवल एक फर्जी. शिकायती पत्र के आधार पर यह निलंबन किया गया था, जो पूरी तरह से गैर-कानूनी है। अधिवक्ता मिश्र ने बताया कि निलंबन का पूरा आधार एक विधायक द्वारा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) व्यावसायिक शिक्षा और कौशल विकास विभाग को २२ मई २०२६ को लिखा गया कथित पत्र था। यह पत्र २५ मई को निदेशक कार्यालय पहुंचा, २६ मई को विशेष सचिव को भेजा गया और अगले ही दिन यानी २७ मई को बिना किसी प्रारंभिक जांच के महकमे के एडी (प्रशिक्षण) धीरेंद्र कुमार को निलंबित कर दिया गया।
हैरत की है कि उसी विधायक ने २६ मई २०२६ को एक दूसरा आधिकारिक पत्र जारी कर दिया कि उन्होंने २२ मई ,२६ को ऐसा कोई पत्र लिखा ही नहीं है। यानी जिस पत्र को आधार बनाकर कार्रवाई की गई, वह पूरी तरह फर्जी था। इसके बावजूद विभाग ने आंखें मूंदकर निलंबन आदेश जारी कर दिया |
याचिकाकर्ता के वकील ने कोर्ट को बताया कि सरकार के खुद के कई ऐसे शासनादेश हैं, जिनमें स्पष्ट रूप से प्रावधान है कि जब तक किसी शिकायत की प्रारंभिक सत्यता की पुष्टि न हो जाए, तब तक किसी सरकारी सेवक के खिलाफ कोई जांच या निलंबन जैसी कार्रवाई शुरू नहीं की जा सकती। इस मामले में इन सभी नियमों को ताक पर रख दिया गया।
तमाम परिस्थितियों को देखते हुए न्यायमूर्ति सुधांशु चौहान की एकल पीठ ने सहायक निदेशक धीरेंद्र कुमार के निलंबन आदेश के प्रभाव और संचालन पर तत्काल प्रभाव से अंतरिम रोक लगा दी है |
