मुख्यपृष्ठस्तंभकहानी अनकही : कुछ कहानियां खामोशी में भी पूरी हो जाती हैं!

कहानी अनकही : कुछ कहानियां खामोशी में भी पूरी हो जाती हैं!

सना खान

हर इंसान के भीतर एक ऐसी कहानी होती है, जिसे वह कभी पूरी तरह किसी से कह नहीं पाता। आरव की भी एक ऐसी ही कहानी थी। वह शहर के सबसे व्यस्त लोगों में से एक था। अच्छी नौकरी, बड़ा घर, ढेर सारी जिम्मेदारियां। बाहर से देखने वाले कहते, `कितना सफल इंसान है।’ लेकिन कोई यह नहीं जानता था कि हर रात सोने से पहले वह अपने पुराने लकड़ी के बक्से को खोलकर बैठ जाता था। उस बक्से में न कोई कीमती गहना था, न कोई बड़ी दौलत। उसमें बस कुछ पुरानी तस्वीरें, कुछ सूखे फूल और एक अधूरी चिट्ठी रखी थी। वह चिट्ठी मीरा की थी। मीरा, जो कभी उसकी सबसे अच्छी दोस्त हुआ करती थी। दोनों ने साथ में सपने देखे थे, साथ में संघर्ष किया था। लेकिन जिंदगी के मोड़ कभी-कभी लोगों को अलग दिशाओं में ले जाते हैं। एक दिन मीरा बिना कुछ कहे शहर छोड़कर चली गई। सालों बीत गए। आरव ने कभी उसे ढूंढ़ने की कोशिश नहीं की। शायद उसे डर था कि कहीं जवाब उसकी उम्मीदों से अलग न हो। लेकिन उसने उस अधूरी चिट्ठी को कभी नहीं फेंका।
एक बरसाती शाम, जब खिड़की पर बारिश की बूंदें दस्तक दे रही थीं, आरव ने फिर वही चिट्ठी खोली। उसमें सिर्फ इतना लिखा था, `अगर कभी हम बिछड़ जाएं, तो यह मत सोचना कि मैं तुम्हें भूल गई। कुछ रिश्ते साथ रहकर नहीं, याद बनकर पूरे होते हैं।’ आरव की आंखों में नमी उतर आई। उसे पहली बार एहसास हुआ कि कुछ कहानियों का अंत मिलन नहीं होता, लेकिन वे अधूरी भी नहीं होतीं। कुछ लोग हमारे जीवन में हमेशा के लिए रहने नहीं आते, बल्कि हमें कुछ सिखाकर आगे बढ़ जाना सिखाने आते हैं। उस रात आरव ने वह चिट्ठी वापस बक्से में नहीं रखी। उसने उसे खिड़की के पास रखा, मुस्कुराया और पहली बार दिल से कहा, `धन्यवाद, मीरा।’ क्योंकि अब वह समझ चुका था कि हर अनकही कहानी दर्द नहीं होती। कुछ कहानियां हमारी सबसे खूबसूरत याद बन जाती हैं और शायद इसी का नाम जिंदगी है।

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