सूफी खान
ईरान का पहला हमला होते ही कूद पड़े हूती
रविवार-सोमवार की दर्मियानी रात जैसे ही मिडिल ईस्ट में ईरान वर्सेस इजरायल शुरु हुआ, वैसे ही दुनिया को तेल गैस और दूसरे सामान सप्लाई का एक और अहम समुद्री रास्ता बंद कर दिया गया।
मिडिल ईस्ट में अब इजरायल की मनमानी की कीमत अब सऊदी, यूएई, कतर सबको चुकानी पड़ेगी। ईरान के मना करने के बावजूद साउथ लेबनान पर इजरायल हमले पर हमले किया जा रहा था। इससे भड़के ईरान ने पलटकर मिसाइलों की झड़ी लगा दी। लेकिन अब यमन के अंसारुल्लाह यानी हूती ईरान के समर्थन में आ गए हैं। यमन में हूतियों के प्रवक्ता यह्या सारी ने लान कर दिया है कि हम लाल सागर में दुश्मन के जहाजों के गुरजने पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाते हैं।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के बाद ये समद्री रास्ता मिडिल ईस्ट के देशों के तेल व्यापार का एक महत्वपूर्ण रास्ता है। बाब अल-मंदेब पर लाल सागर में यमन और अफ्रीका के जिबूती के बीच संकरा समुद्री रास्ता है। ये लाल सागर यानी रेड सी को अदन की खाड़ी और हिंद महासागर से जोड़ता है। बाब अल मंदब स्वेज नहर का एंट्री पाइंट है, जो एशिया और यूरोप के बीच की दूरी को कम करता है। जैसे होर्मुज पर ईरान का कंट्रोल है वैसे ही यमन के अंसारुल्लाह या हूती का बाब अल मंदब पर दबदबा है। अब हूतियों ने इसे बंद कर दिया है। लेबनान में बार-बार मना करने के बावजूद इजरायल की हिजबुल्ला के खिलाफ नाफरमानियों से भड़के ईरान ने हाइफा और नाजरेथ को निशाना बना दिया। ७-८ जून की दर्मियानी रात ईरान की मिसाइलें इजरायल पर बरसने लगीं। हालांकि, इजरायल इन्हें इनंटरसेप्ट करने का दावा करता है। लेकिन सायरन की आवाजें और अफरातफरी इजरायल में साफ नजर आई।
हालांकि, प्रेसिडेंट ट्रंप किसी भी अप्रिय स्थिति को टालने की पूरी कोशिश कर रहे हैं, लेकिन यमन के हूतियों का रवैया बता रहा है कि वो ईरान के पक्ष में खुल कर आकर खड़े हो गए हैं। अब यमन से भी इजरायल की तरफ मिसाइलों का दौर फिर शुरु हो सकता है। एक्सपर्ट कहते हैं कि इस बार ईरान के जरिए किए गए पहले अटैक से ये समझ आ रहा है कि ईरान अपने प्रॉक्सी का साथ नहीं छोड़ेगा। जब तक वो अकेले लड़ सकते हैं, वो लड़ने दे रहा है। लेकिन जब उसे एहसास हुआ कि लेबनान के हिजबुल्लाह को अब उसकी जरूरत है, उसने इजरायल पर अटैक कर दिया। वहीं ईरान के दूसरे प्रॉक्सी हूती ने भी बाब अल मंदब बन करके एक तरह से एलान ए जंग कर ही दिया है। ईरान की सरकारी मीडिया के मुताबिक, सैन्य अधिकारियों ने कहा है कि अगर इजरायल ने दक्षिणी लेबनान या बेरूत पर हमले जारी रखे तो उसे और ज्यादा ‘कुचल देने वाले’ हमलों का सामना करना पड़ेगा।
