जेदवी / मुंबई
कुर्ला से घाटकोपर तक जलापूर्ति ठप
मरम्मत के नाम पर दिनभर जलापूर्ति रही बाधित
टैंकर हड़ताल ने बढ़ाई परेशानी
पहले से लागू १० प्रतिशत जलकटौती के बीच निजी वॉटर टैंकरों की हड़ताल ने हालात और कठिन बना दिए हैं। पाइपलाइन फटने और वैकल्पिक जलापूर्ति प्रभावित होने से नागरिकों को दोहरी मार झेलनी पड़ रही है। सोमवार को भी कम दबाव से पानी आया है।
मानसून की शुरुआत से पहले ही मुंबई की जलापूर्ति व्यवस्था की कमजोरियां उजागर होने लगी हैं। कुर्ला (दक्षिण) के तिलक नगर नाला क्षेत्र में १२०० मिमी व्यास की प्रमुख वॉटर पाइपलाइन क्षतिग्रस्त होने से रविवार को कई इलाकों में पानी की आपूर्ति पूरी तरह ठप हो गई। इसका असर हजारों परिवारों पर पड़ा, जिन्हें रोजमर्रा की जरूरतों के लिए पानी के संकट का सामना करना पड़ा। सोमवार को भी नागरिकों को देर से और कम दबाव के साथ पानी की आपूर्ति की गई।
मनपा के अनुसार, पाइपलाइन की मरम्मत का कार्य शनिवार रात से युद्धस्तर पर जारी रहा। हालांकि तकनीकी खराबी का खामियाजा आम नागरिकों को भुगतना पड़ा। भीषण गर्मी और दैनिक जरूरतों के बीच अचानक जलापूर्ति बंद होने से प्रभावित क्षेत्रों में नाराजगी का माहौल देखने को मिला। इस संकट का सबसे अधिक असर कुर्ला, तिलक नगर, जरीमरी, घाटकोपर-अंधेरी लिंक रोड, नवपाड़ा, मिलिंद नगर, काजूपाड़ा, बैल बाजार, क्रांति नगर, ब्राह्मणवाड़ी और टैक्सीमैन कॉलोनी जैसे घनी आबादी वाले इलाकों में पड़ा। कई परिवारों को पानी का संग्रह कर उसका सीमित उपयोग करने के लिए मजबूर होना पड़ा।
मनपा के अनुसार, जमीन से लगभग पांच मीटर नीचे स्थित क्षतिग्रस्त पाइपलाइन के डेढ़ मीटर हिस्से को बदला गया है और प्रभावित क्षेत्रों में जलापूर्ति चरणबद्ध तरीके से बहाल की गई।
हर वर्ष मानसून से पहले रखरखाव के बड़े-बड़े दावों के बावजूद बार-बार सामने आने वाली ऐसी घटनाएं शहर के जल प्रबंधन की हकीकत उजागर कर रही हैं। सवाल यह है कि आखिर मुंबईकरों को हर साल इसी तरह पानी के संकट का सामना क्यों करना पड़ता है?
