मुख्यपृष्ठस्तंभमहाराष्ट्रनामा: कर्जमाफी की कैंची, आंकड़ों का आईना और राजनीति का चलता-फिरता तमाशा!

महाराष्ट्रनामा: कर्जमाफी की कैंची, आंकड़ों का आईना और राजनीति का चलता-फिरता तमाशा!

राजन पारकर

महाराष्ट्र की राजनीति में फिर एक बार शब्दों की फसल लहलहा रही है। कहीं कर्जमाफी की घोषणा है, कहीं आर्थिक महासत्ता के सपनों की गिनती है, तो कहीं आरोपों की तोपें धड़ाधड़ चल रही हैं।
मुख्यमंत्री कहते हैं- कर्जमाफी में कोई शर्त नहीं, बस एक शर्त है!
राजनीति का यह नया गणित भी बड़ा कमाल का है-
जहां ‘एक शर्त’ बोलते ही उसके पीछे दस सवाल खड़े हो जाते हैं।
किसान पूछ रहा है-
‘साहब, मौसम की मार मेरी, बाजार की मार मेरी, कर्ज का बोझ मेरा, अब राहत भी हिसाब-किताब देखकर मिलेगी क्या?’
जिला सहकारी बैंकों को बचाना जरूरी है, यह बात अपनी जगह सही है।
लेकिन जिस किसान की मेहनत से गांव की अर्थव्यवस्था चलती है, उसकी चिंता भी सत्ता के तराजू में बराबर तौली जानी चाहिए।
‘देश की तिजोरी मजबूत, लेकिन आम आदमी की जेब का क्या?’
दूसरी तरफ देश की अर्थव्यवस्था के बड़े-बड़े आंकड़े सामने रखे गए।
विदेशी मुद्रा भंडार, विकास दर, डिजिटल क्रांति, जीडीपी- आंकड़ों की ऐसी आतिशबाजी हुई कि आम आदमी कुछ पल के लिए अपनी जेब टटोलना भूल गया।
देश आगे बढ़ रहा है, यह गर्व की बात है।
लेकिन विकास की सड़क पर चलते हुए अगर किसान के पैर में पड़े छाले दिखाई न दें तो आईना अधूरा रह जाता है।
अर्थव्यवस्था की ऊंची इमारत तभी मजबूत होगी, जब उसकी नींव में खड़ा किसान भी सुरक्षित महसूस करेगा।
‘हादसा हो या सियासत- सच हमेशा धुएं के पीछे छिप जाता है!’
तीसरी खबर ने राजनीति के मैदान में फिर आग लगा दी।
आरोपों की बारिश, सवालों की आंधी और बयानबाजी का तूफान…
आज की राजनीति में कभी-कभी लगता है कि जांच से पहले फैसला और तथ्य से पहले आरोप पैदा हो जाते हैं।
जनता को नारे नहीं चाहिए, जवाब चाहिए।
उसे चाहिए कि सच सामने आए -चाहे वह किसी के पक्ष में हो या विपक्ष में।
आज देश एक अजीब दौर में खड़ा है
एक तरफ किसान कर्जमाफी की लाइन में है, दूसरी तरफ देश विश्व शक्ति बनने की दौड़ में है और तीसरी तरफ राजनीति आरोपों के अखाड़े में कुश्ती लड़ रही है।
नेताओं के भाषणों में देश आसमान छू रहा है…
लेकिन जनता पूछ रही है-
‘आसमान कितना भी ऊंचा हो जाए साहब, जमीन पर खड़े इंसान की तकलीफ कब दिखाई देगी?’
क्योंकि इतिहास तालियों से नहीं,
जनता के जीवन में आए बदलाव से लिखा जाता है।

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