मुख्यपृष्ठस्तंभमुंबई में भी इसी तरह के कड़े कदम क्यों नहीं उठाए जाएं!

मुंबई में भी इसी तरह के कड़े कदम क्यों नहीं उठाए जाएं!

मनमोहन सिंह

-दिल्ली में हर घर के लिए फायर सेफ्टी नियम अनिवार्य

देश की राजधानी दिल्ली में लगातार हो रहे अग्निकांडों और हाल ही में मालवीय नगर में हुए भीषण हादसे, जिसमें २३ लोगों की जान चली गई थी, के बाद दिल्ली सरकार हर छोटे-बड़े घर, स्वतंत्र मकान और बिल्डर फ्लोर के लिए फायर सेफ्टी नियमों को कानूनी रूप से अनिवार्य करने जा रही है। दिल्ली के इस बड़े कदम के बाद, देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में भी इसी तरह के कड़े नियम सभी श्रेणियों की आवासीय इमारतों पर लागू करने जरूरत से इनकार नहीं किया जा सकता।
दिल्ली में अब ४ महत्वपूर्ण बदलाव जरूरी हैं
दिल्ली सरकार बिल्डिंग बायलॉज में संशोधन कर रही है। अब तक फायर सेफ्टी नियम केवल १५ मीटर से ऊंची इमारतों पर लागू होते थे, लेकिन अब यह हर घर के लिए अनिवार्य होंगे।
 हर घर में स्मोक डिटेक्टर  फायर हाइड्रेंट की व्यवस्था
 इमरजेंसी एग्जिट  कम ज्वलनशील कंस्ट्रक्शन मटेरियल
अब नजर डालते हैं आर्थिक राजधानी
मुंबई के फायर सेफ्टी सिस्टम को लेकर बदलाव की जरूरत है। मुंबई में हाई राइजेज के लिए तो ‘महाराष्ट्र फायर प्रिवेंशन एंड लाइफ सेफ्टी मेजर्स एक्ट’ के तहत कड़े नियम हैं, लेकिन चॉल, झोपड़पट्टी, स्लम और ३२ मीटर से कम ऊंचाई वाली पुरानी इमारतों में सुरक्षा रामभरोसे है। यदि दिल्ली की तर्ज पर मुंबई में भी यह प्रावधान पूरी तरह लागू किए जाएं तो मुंबई मे भी फायर सेफ्टी सिस्टम की तस्वीर बदल जाएगी।
चॉलों और कम ऊंचाई वाली इमारतों का दायरा
मुंबई में लाखों लोग पुरानी पगड़ी सिस्टमवाली इमारतों और चॉलों में रहते हैं। दिल्ली की तरह अगर मुंबई में भी कम ऊंचाईवाले भवनों में स्मोक डिटेक्टर और फायर एक्स्टिंग्विशर अनिवार्य कर दिए जाएं तो कालबादेवी, भायखला और कुर्ला जैसे घनी आबादी वाले इलाकों में बड़े हादसों को रोका जा सकता है।
संकरी गलियों और स्लम इलाकों के लिए चुनौती
मुंबई की सबसे बड़ी चुनौती धारावी मनकुंड गोवंडी कुर्ला जैसी झोपड़पट्टी इलाकों में और दक्षिण मुंबई की बेहद संकरी गलियों में हैं, जहां बड़ी फायरब्रिगेड गाड़ियां नहीं पहुंच पातीं। मुंबई फायरब्रिगेड को दिल्ली की तरह ही रिस्पॉन्स टाइम सुधारने के लिए ‘फायर बाइक्स’ और ‘मिनी फायर फाइटिंग वेहिकल्स’ के नेटवर्क को हर वार्ड में अनिवार्य करना होगा।
सोसायटियों पर आएगा अतिरिक्त खर्च
मुंबई की हजारों री-डेवलपमेंट सोसायटियों और बिल्डर्स को अगले ३ साल में फायर इंप्रâास्ट्रक्चर अपग्रेड करना होगा। हालांकि, इससे मुंबईकर्स की जेब पर मेंटेनेंस का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा, लेकिन जिंदगी की सुरक्षा के लिहाज से यह बेहद जरूरी कदम होगा।
मुंबई के फायर सेफ्टी एक्सपर्ट्स का मानना है कि दिल्ली सरकार का यह कदम पूरे देश के लिए एक मॉडल है। मुंबई महानगरपालिका को भी केवल ऊंची इमारतों पर ध्यान देने के बजाय, दिल्ली की तरह मुंबई के हर एक घर को फायर सेफ्टी नेट के दायरे में लाना चाहिए।

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