मुख्यपृष्ठस्तंभनई पीढ़ी पर हावी होता डिप्रेशन

नई पीढ़ी पर हावी होता डिप्रेशन

हैदराबाद और इटावा की दो दुखद घटनाओं ने समाज को फिर सोचने पर मजबूर किया है कि पढ़ी-लिखी, सफल और आगे बढ़ती दिखने वाली नई पीढ़ी भीतर से कितने गहरे मानसिक दबाव में जी रही है।
हैदराबाद की घटना:
हैदराबाद के मियापुर में ३७ वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर ईशा साहू ने कथित रूप से अपनी छह महीने की बच्ची को गोद में लेकर छठी मंजिल से छलांग लगा दी। इस हादसे में ईशा की मौके पर ही मौत हो गई, लेकिन बच्ची की जान बच गई। पुलिस के अनुसार, महिला कई महीनों से नींद न आने की समस्या और गंभीर मानसिक तनाव से जूझ रही थी। अनिद्रा और मानसिक तनाव को मामूली समझना कितना खतरनाक हो सकता है।
इटावा की घटना:
इटावा में नीट पीजी की तैयारी कर रहीं २७ वर्षीय डॉक्टर सौम्या दीक्षित ने कथित रूप से आत्महत्या कर ली। घटना के समय वह घर में अकेली थीं; पिता के लौटने पर दरवाजा न खुलने से पड़ोसियों की मदद ली गई।
जांच में उनके टैबलेट और लैपटॉप से दो वीडियो संदेश मिलने की बात सामने आई है। इन संदेशों में डिप्रेशन, एंजाइटी, निराशा और पहले भी आत्महत्या के प्रयास का जिक्र बताया गया है। ये दोनों घटनाएं केवल पुलिस केस नहीं, बल्कि समाज के लिए चेतावनी हैं। आज का युवा बाहर से आधुनिक, आत्मनिर्भर और सफल दिखाई देता है, लेकिन भीतर से कई अदृश्य लड़ाइयां लड़ रहा है। करियर में लगातार आगे बढ़ने की होड़, परिवार की अपेक्षाएं और सोशल मीडिया पर सफल दिखने की मजबूरी—ये सब मिलकर मन पर भारी बोझ डालते हैं। सबसे बड़ी चिंता यह है कि हमारे समाज में मानसिक बीमारी को अब भी सामान्य बीमारी की तरह स्वीकार नहीं किया जाता। बुखार या रक्तचाप होने पर लोग डॉक्टर के पास जाते हैं, लेकिन डिप्रेशन, घबराहट, अनिद्रा, डर, निराशा या आत्मघाती विचारों पर अक्सर चुप्पी साध ली जाती है। परिवार भी कई बार इसे कमजोरी, जिद या नकारात्मक सोच मानकर टाल देता है। यही चूक कई बार जानलेवा साबित हो सकती है। डिप्रेशन के संकेत धीरे-धीरे दिखाई देते हैं। लंबे समय तक उदासी, नींद बिगड़ना, भूख कम या ज्यादा होना, किसी काम में रुचि न रहना, लोगों से कटना, बार-बार रोना, खुद को बोझ समझना, पढ़ाई या काम में अचानक गिरावट आना और निराशा भरी बातें करना-इन संकेतों को गंभीरता से लेना चाहिए।
चुप्पी बन रही जानलेवा खतरा
विशेषज्ञों का मानना है कि डिप्रेशन, एंजाइटी और निराशा को नजरअंदाज करना खतरनाक साबित हो सकता है। लंबे समय तक उदासी, नींद की समस्या, लोगों से दूरी और आत्मघाती विचार जैसे संकेतों को समय रहते पहचानना और मानसिक स्वास्थ्य को गंभीरता से लेना बेहद जरूरी है।

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