मुख्यपृष्ठखेलतड़का: भारतीय नाविकों पर हमले समुद्री सुरक्षा पर बड़ा सवाल

तड़का: भारतीय नाविकों पर हमले समुद्री सुरक्षा पर बड़ा सवाल

कविता श्रीवास्तव

मध्य पूर्व में अमेरिका-ईरान संघर्ष के बीच समुद्री सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा हुई हैं। पिछले कुछ दिनों में ओमान के तट और होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास भारतीय क्रू वाले तीन कमर्शियल जहाजों पर हमले हुए हैं। दुखद बात यह है कि हमलों में तीन भारतीय नाविकों की मौत हो गई है। अंतर्राष्ट्रीय जलमार्गों में व्यापारिक जहाजों को निशाना बनाना अनुचित है और ऐसे हमले तुरंत बंद होने चाहिए। यह अंतर्राष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन है। सबसे गंभीर घटना १० जून को सामने आई, जब पलाऊ-ध्वज वाले तेल टैंकर एमटी सेटेबेलो पर ओमान तट के निकट हमला हुआ। जहाज पर २४ भारतीय नाविक सवार थे। इनमें से २१ को सुरक्षित बचा लिया गया, लेकिन तीन भारतीय नाविकों की मौत हो गई। बाद में उनकी पहचान चीफ इंजीनियर पतनाला सुरेश, डेक वैâडेट आदित्य शर्मा और फिटर शिवानंद चौरसिया के रूप में हुई। भारत ने इस घटना के बाद नई दिल्ली में अमेरिकी दूतावास के वरिष्ठ अधिकारी को तलब कर कड़ा विरोध दर्ज कराया। इससे पहले ८ जून को एमटी मेरिवैक्स नामक जहाज भी हमले का शिकार बना था। उसके सभी २४ भारतीय नाविकों को सुरक्षित निकाल लिया गया था। बताया गया कि जहाजकर्मियों और अमेरिकी नौसेना के बीच कुछ संचार भी हुआ था, लेकिन अंतत: जहाज पर हमला कर दिया गया। इसके बाद ११ जून को तीसरी घटना में एमटी जलवीर नामक जहाज ओमान के शिनास बंदरगाह के निकट हमले की चपेट में आ गया। हालांकि, जहाज पर सवार सभी २० भारतीय नाविक सुरक्षित हैं। लेकिन चिंता की बात यह है कि खाड़ी युद्ध का असर अब अंतर्राष्ट्रीय समुद्री व्यापार पर पड़ रहा है। भारतीय विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि वाणिज्यिक जहाजों और नागरिकों को निशाना बनाना अंतर्राष्ट्रीय कानून और समुद्री सुरक्षा के सिद्धांतों के विपरीत है। तनाव कम करने, कूटनीतिक समाधान खोजने और समुद्री मार्गों पर निर्बाध व्यापार बहाल करने की अपील की गई है। भारत ने यूएन में यह मुद्दा उठाया है। गौरतलब है कि होर्मुज ही वर्तमान युद्ध के केंद्र में है। यह विश्व ऊर्जा आपूर्ति का सबसे महत्वपूर्ण मार्ग है।

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