मुख्यपृष्ठस्तंभकहानी अनकही : हर मुस्कान के पीछे एक दर्द होता है!

कहानी अनकही : हर मुस्कान के पीछे एक दर्द होता है!

सना खान

रमेश एक सरकारी दफ्तर में चपरासी था। पिछले तीस वर्षों से वह उसी दफ्तर में काम कर रहा था। हर सुबह सबसे पहले आता, सबकी मेजें साफ करता, चाय पहुंचाता और दिनभर चुपचाप अपना काम करता। दफ्तर में कई अधिकारी आए और चले गए, लेकिन रमेश वहीं रहा। लोग उसे जानते तो थे, पर शायद ही किसी ने कभी उसके जीवन के बारे में जानने की कोशिश की हो।
एक दिन उसके सेवानिवृत्ति का दिन आ गया। दफ्तर में विदाई समारोह रखा गया। सभी कर्मचारियों ने उसकी ईमानदारी, समय की पाबंदी और मेहनत की सराहना की। फिर वरिष्ठ अधिकारी ने रमेश को मंच पर बुलाया। रमेश धीरे-धीरे माइक तक पहुंचा। उसके हाथ कांप रहे थे। उसने कहा, `मैंने इस दफ्तर में तीस साल काम किया। मुझे कभी कोई बड़ा पद नहीं मिला, न कोई विशेष सम्मान। लेकिन मुझे इस बात का गर्व है कि मेरी कमाई का हर रुपया ईमानदारी का था।’
पूरा हॉल शांत हो गया। कुछ पल रुककर उसने आगे कहा, `आज मेरा बेटा डॉक्टर है और मेरी बेटी शिक्षक। मैंने अपनी पूरी जिंदगी उनकी पढ़ाई और उनके सपनों को पूरा करने में लगा दी। लोग मुझे एक चपरासी के रूप में जानते रहे, लेकिन मेरी असली पहचान मेरे बच्चों की सफलता में छिपी थी।’
उसकी आंखें नम हो गर्इं। हॉल में बैठे कई लोगों की आंखें भी भर आर्इं। उस दिन पहली बार लोगों ने रमेश की वर्दी के पीछे छिपे संघर्ष, त्याग और आत्मसम्मान को देखा। समारोह समाप्त हो गया। लोग अपने-अपने घर लौट गए, लेकिन रमेश के शब्द सबके मन में रह गए। क्योंकि हर व्यक्ति के जीवन में एक ऐसी कहानी होती है, जिसे दुनिया नहीं जानती। एक ऐसी कहानी जो शोर नहीं करती, फिर भी बहुत कुछ कह जाती है।
वही होती है-कहानी अनकही।

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