सुनील ओसवाल / मुंबई
महाराष्ट्र में महायुति सरकार भले ही एकजुटता का दावा कर रही हो, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयां कर रही है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के राजनीतिक प्रभाव वाले विदर्भ क्षेत्र में ही उनकी वैâबिनेट के दो मंत्रियों के बीच कथित टकराव अब खुलकर सामने आता दिख रहा है। इस खींचतान का खामियाजा सीधे विकास कार्यों को भुगतना पड़ रहा है। यवतमाल जिले के रालेगांव विधानसभा क्षेत्र में गालमुक्त धरण व गालयुक्त शिवार योजना के तहत मंजूर किए गए ८१ कार्यों पर अचानक रोक लगा दी गई है। आदिवासी विकास मंत्री डॉ. अशोक उईके की आपत्ति के बाद प्रशासन ने इन कार्यों को स्थगित कर दिया है। मामला इतना बढ़ गया कि शुरू हो चुके कार्यों की भी जांच के आदेश दे दिए गए।
सूत्रों के अनुसार, इन कार्यों को मंजूरी देते समय स्थानीय विधायक एवं मंत्री डॉ. उईके को विश्वास में नहीं लिया गया था। इसी नाराजगी के बाद उन्होंने राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले को पत्र लिखकर पूरे प्रस्ताव पर सवाल खड़े किए। पत्र में न केवल कार्यों की प्रक्रिया पर आपत्ति जताई गई, बल्कि ८१ मंजूर कार्यों को निरस्त कर नए सिरे से मंजूरी देने की मांग भी की गई।
स्थगन के भंवर में
स्थिति यह है कि जिन कार्यों के वर्क ऑर्डर जारी हो चुके थे और जिन पर काम शुरू भी हो गया था, वे अब जांच और स्थगन के भंवर में फंस गए हैं। इससे स्थानीय स्तर पर ठेकेदारों, किसानों और लाभार्थियों में असमंजस की स्थिति पैदा हो गई है।
वर्चस्व का विवाद
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि यह विवाद केवल प्रशासनिक प्रक्रिया का नहीं, बल्कि क्षेत्रीय राजनीतिक वर्चस्व का भी है। यवतमाल जिले में पालकमंत्री संजय राठोड़ और आदिवासी विकास मंत्री अशोक उईके के बीच लंबे समय से चल रही अंदरूनी रस्साकशी अब विकास योजनाओं तक पहुंच गई है।
विदर्भ में ज्यादा असर
दिलचस्प बात यह है कि यह पूरा विवाद मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के राजनीतिक प्रभाव वाले विदर्भ क्षेत्र में हो रहा है। ऐसे में विपक्ष ही नहीं, सत्ता पक्ष के भीतर भी यह सवाल उठने लगा है कि यदि सीएम अपने ही दो मंत्रियों के बीच समन्वय नहीं करा पा रहे है तो राज्य की व्यापक राजनीतिक और प्रशासनिक चुनौतियों पर उनका नियंत्रण कितना प्रभावी है?
