मनमोहन सिंह
‘अरे! तुम तो करोड़ों के मालिक हो न करण? फिर हम इस टूटे-फूटे मकान में क्यों आए हैं? और तुम्हारी वो बड़ी-बड़ी गाड़ियां कहां हैं?’ मुरैना के एक गुमनाम गांव के बदरंग कमरे में बैठी उस १८ साल की लड़की की आवाज में घबराहट और एक अनजाना डर था। लेकिन सामने खड़े लड़के के चेहरे पर अब वो रईसी वाला गुरूर नहीं, बल्कि एक शातिर खामोशी थी।
यह कोई फिल्मी सीन नहीं, बल्कि मध्य प्रदेश के शहडोल की रहनेवाली फर्स्ट ईयर की एक कॉलेज छात्रा की जिंदगी की वो खौफनाक हकीकत थी, जो उसने सोशल मीडिया की आभासी चकाचौंध के चक्कर में खुद चुनी थी। इंस्टाग्राम की रील्स में दिखनेवाली महंगी कारें, आलीशान बंगले और वीआईपी लाइफस्टाइल, इस वर्चुअल वर्ल्ड के पीछे छिपा था एक ऐसा जाल, जिसमें यह भोली-भाली लड़की पूरी तरह अंधी हो चुकी थी।
कहानी की शुरुआत हुई थी इंस्टाग्राम पर, जहा लड़की की मुलाकात ‘करण राजपूत’ नाम के एक लड़के से हुई। करण की प्रोफाइल किसी बड़े घराने के रईसजादे जैसी थी। कभी चमचमाती गाड़ियों के साथ तस्वीरें, तो कभी किसी आलीशान महल जैसे घर के सोफे पर बैठे वीडियो। लड़की को लगा कि उसकी किस्मत चमक गई है। उसे लगा कि स्क्रीन पर दिखनेवाली यह लग्जरी लाइफ अब उसकी होने वाली है। बातों-बातों में प्यार का ऐसा खुमार चढ़ा कि लड़की ने अपना घर, परिवार और पढ़ाई सब कुछ छोड़कर उस ‘राजकुमार’ के साथ भागने का पैâसला कर लिया।
साजिश बेहद शातिर थी। ६ जून को वह लड़का बस और ऑटो बदलकर शहडोल पहुंचा और लड़की को लेकर मुरैना फरार हो गया। पीछे परिवार में कोहराम मच गया। पुलिस हरकत में आई, साइबर सेल ने मोबाइल की लोकेशन खंगाली और जब पुलिस ने मुरैना के एक गांव में दबिश दी, तो जो सच सामने आया उसने सबके होश उड़ा दिए।
जिस लड़के को लड़की करोड़ों का मालिक समझकर अपना सब कुछ दांव पर लगा आई थी, वह कोई रईसजादा नहीं था। उसका असली नाम करण राजपूत नहीं, बल्कि करण धनक था और वह दूसरों के घरों में पुट्टी और पुताई करनेवाला एक मामूली मजदूर था। वह जिन आलीशान बंगलों में मजदूरी करने जाता था, वहीं चुपके से महंगी गाड़ियों और खूबसूरत कमरों के साथ रील्स बनाकर सोशल मीडिया पर रईसी का ढोंग रचता था।
पुलिस को देखते ही वह शातिर मजदूर तो फरार हो गया, लेकिन उस लड़की के सुनहरे सपनों का महल पल भर में ढह गया। वह लग्जरी लाइफ के चक्कर में अपना सब कुछ गंवा बैठी थी। पुलिस ने रोती-बिलखती लड़की को उसके माता-पिता को सौंप दिया है, लेकिन यह कहानी सोशल मीडिया पर आंख मूंदकर भरोसा करने वालों के लिए एक बहुत बड़ा सबक छोड़ गई है।
रील्स की दुनिया, हकीकत से अलग
महंगी कारें, आलीशान बंगले और लग्जरी लाइफ दिखाने वाली सोशल मीडिया रील्स हमेशा सच नहीं होतीं। शहडोल की छात्रा का मामला बताता है कि वर्चुअल दुनिया की चमक-दमक के पीछे धोखा भी छिपा हो सकता है। किसी अनजान व्यक्ति पर भरोसा करने से पहले उसकी सच्चाई परखना बेहद जरूरी है।
