सोम प्रकाश / उत्तर प्रदेश
उत्तर प्रदेश के जौनपुर (रसुलहां, रामपुर) में जन्मे और वर्तमान में महाराष्ट्र को अपनी कर्मभूमि बनाने वाले प्रख्यात कवि, लेखक और संपादक ठा. भरत सिंह साहित्य जगत में निरंतर अपनी अनमोल सेवाएं दे रहे हैं। श्रीमती चम्पा देवी एवं श्री सुबेदार सिंह के सुपुत्र ठा. भरत सिंह आज हिंदी साहित्य और पत्रकारिता का एक जाना-माना नाम बन चुके हैं।
ठा. भरत सिंह ने हिंदी भाषा और पत्रकारिता के क्षेत्र में कई बड़ी डिग्रियां हासिल की हैं। उन्होंने प्रयाग हिंदी विश्वविद्यालय से ‘साहित्य-विशारद’, राष्ट्रभाषा सभा, पुणे से ‘पंडित’, मुंबई हिंदी विद्यापीठ से ‘साहित्य-सुधाकर’ और पत्रकारिता महाविद्यालय, दिल्ली से ‘पत्रकार’ की परीक्षाएं उत्तीर्ण कर ये उपाधियाँ प्राप्त की हैं।
वर्तमान में वे प्रसिद्ध हिंदी मासिक पत्रिका “कारवां” के संपादक के रूप में कार्य कर रहे हैं। इसके साथ ही वे समाज और साहित्य की भलाई के लिए कई महत्वपूर्ण पदों पर भी कार्यरत हैं। वे ऑल प्रेस एंड राइट्स एसोसिएशन (महाराष्ट्र प्रदेश) के अध्यक्ष, अखिल भारतीय साहित्य परिषद (महाराष्ट्र प्रदेश) के कार्याध्यक्ष, उत्तर प्रदेश वेलफेयर महाराष्ट्र प्रदेश के प्रदेश उपाध्यक्ष, साहित्य सरिता हिंदी मंच (नाशिक) के कार्याध्यक्ष, विद्योत्तमा फाउंडेशन (नाशिक) के उपाध्यक्ष, निर्मिति पत संस्था (नाशिक) के संचालक तथा सनवेद हेल्थ केयर एलएलपी के संचालक हैं।
ठा. भरत सिंह की कलम से निकले शब्द पाठकों के दिलों को छू लेते हैं। उनकी प्रमुख प्रकाशित पुस्तकों में ‘भरत काव्य सुधा’, ‘कविता के गांव में’, ‘चम्पा के फूल’, ‘नाशिक युगों-युगों की साक्षी नगरी’, ‘सजनी’ (खंडकाव्य) और ‘नित्य पठनीय श्लोक : काव्यमय भावार्थ सहित’ शामिल हैं।
साहित्य के प्रति उनके इसी समर्पण को देखते हुए उन्हें देश की कई प्रतिष्ठित संस्थाओं ने सम्मानित किया है। उन्हें हिंदी साहित्य सभा, आगरा द्वारा ‘साहित्यकार सम्मान’, अखिल भारतीय हिंदी सेवा संस्थान, इलाहाबाद द्वारा ‘राष्ट्रभाषा गौरव सम्मान’ तथा उत्तर भारतीय समाज एजुकेशनल एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट (आगरा) द्वारा ‘साहित्यसेवी सम्मान’ से नवाज़ा जा चुका है। इसके अलावा, सम्मान समिति, बैतूल (मध्य प्रदेश) द्वारा भी उनका भव्य अभिनंदन किया गया है।
उनकी कृति “सजनी” (खंडकाव्य) के लिए महाराष्ट्र राज्य हिंदी साहित्य अकादमी द्वारा महाराष्ट्र शासन ने उन्हें वर्ष 2024-25 के ‘संत नामदेव काव्य पुरस्कार’ से सम्मानित किया है।
ठा. भरत सिंह का जीवन और उनका लेखन आज के युवा लेखकों के लिए एक प्रेरणास्रोत बनकर उभरा है।
