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जन्म से नहीं सुन पाता था मासूम…मुफ्त कॉक्लियर इंप्लांट से मिली सुनने की नई उम्मीद… किसान पिता की चिंता हुई दूर

संदीप पांडेय / मुंबई

मणिपुर के इंफाल निवासी ढाई वर्षीय फििंरजी मयूर खीजर के परिवार के लिए १८ जून का दिन नई उम्मीद लेकर आया। जन्म से सुनने में असमर्थ इस मासूम बच्चे का मुंबई के कुर्ला-पश्चिम स्थित अस्पताल में मुफ्त कॉक्लियर इंप्लांट ऑपरेशन किया गया, जिससे अब उसके सुनने और बोलने की क्षमता विकसित होने की संभावना बढ़ गई है।
फििंरजी के पिता मोहम्मद हनीफ शाह, जो पेशे से किसान हैं और मां गुलदान हुसैन अपने बेटे की समस्या को लेकर लंबे समय से चिंतित थे। बच्चे के जन्म के लगभग नौ महीने बाद उन्हें महसूस हुआ कि वह आवाजों पर कोई प्रतिक्रिया नहीं देता और नाम पुकारने पर भी कोई प्रतिक्रिया नहीं देता था। इसके बाद उन्होंने मणिपुर के एक बड़े अस्पताल में ईएनटी विशेषज्ञ से संपर्क किया, जहां उन्हें आगे के उपचार के लिए गुवाहाटी अथवा दिल्ली जाने की सलाह दी गई।
बेटे को लेकर दिल्ली पहुंचे हनीफ शाह को वहां डॉक्टरों ने कॉक्लियर इंप्लांट कराने की सलाह दी। हालांकि, सर्जरी का अनुमानित खर्च करीब नौ लाख रुपए बताया गया, जिसे सुनकर किसान पिता के सामने गंभीर आर्थिक संकट खड़ा हो गया। सीमित आय के कारण बेटे के इलाज की उम्मीद धूमिल पड़ती नजर आ रही थी। इसी दौरान मुंबई के बोरीवली स्थित श्रवणी स्पीच एंड हियरिंग सेंटर की विशेषज्ञ गीतांजलि सिंह से फोन पर हुई बातचीत ने परिवार को नई राह दिखाई। उन्होंने हनीफ शाह को कुर्ला-पश्चिम स्थित क्रिटीकेयर एशिया मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल के ईएनटी विभाग प्रमुख एवं कॉक्लियर इंप्लांट विशेषज्ञ डॉ. संजय हेलाले से संपर्क करने की सलाह दी। डॉ. हेलाले ने बच्चे की विस्तृत जांच के बाद परिवार को पूरी प्रक्रिया समझाई और ‘श्रव्या कॉक्लियर इंप्लांट प्रोग्राम’ तथा एचसीपी ईएनटी चैरिटेबल ट्रस्ट के सहयोग से १८ जून को फिरिंजी का नि:शुल्क कॉक्लियर इंप्लांट ऑपरेशन किया। सर्जरी के दौरान डॉ. रत्नाकर गोसावी और डॉ. कविता गोहिल भी चिकित्सा टीम का हिस्सा रहीं।
ऑपरेशन सफल रहने के बाद बच्चे को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है। डॉक्टरों के अनुसार, आने वाले महीनों में नियमित थेरेपी और फॉलो-अप के माध्यम से उसकी सुनने और बोलने की क्षमता को विकसित करने में मदद मिलेगी।
नई जिंदगी की सौगात
मणिपुर के ढाई वर्षीय फिरिंजी मयूर खीजर का मुंबई में नि:शुल्क कॉक्लियर इंप्लांट ऑपरेशन सफलतापूर्वक किया गया। आर्थिक तंगी से जूझ रहे किसान परिवार के लिए यह सर्जरी नई उम्मीद बनकर आई है। नियमित थेरेपी के बाद बच्चे के सुनने और बोलने की क्षमता विकसित होने की संभावना है।

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