-मोदी सरकार, बैंकों और ईडी से ४ हफ्ते में मांगा जवाब
सामना संवाददाता / नई दिल्ली
सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत ने जिस तरह से स्ट्रेस्ड लोन (फंसे हुए कर्ज को असाइन और सेटल किया जा रहा था, उस पर चिंता जताई है। उन्होंने एसेट रिकंस्ट्रक्शन कंपनियों (एआरसी), कर्ज लेनेवालों और बैंकों के बीच कथित मिलीभगत से जनता के हजारों करोड़ रुपए की हेरा-फेरी के मामले में कहा कि एआरसी, बैंक और कर्ज लेने वालों के बीच एक गहरी मिलीभगत है।’ सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र के गृह और वित्त मंत्रालयों, रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया और सीरियस प्रâॉड इन्वेस्टिगेशन ऑफिस से जवाब मांगा है। यह मामला नोएडा की एक इंप्रâास्ट्रक्चर कंपनी से जुड़े घोटाले से संबंधित है।
लाइव लॉ की एक रिपोर्ट के अनुसार, चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस वी मोहन की वेकेशन बेंच ने इस मामले की सुनवाई की और केंद्र सरकार, रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया, एनफोर्समेंट डायरेक्टरेट, सीरियस प्रâॉड इन्वेस्टिगेशन ऑफिस, सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन और सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया से चार हफ्ते के अंदर जवाब मांगा।
लाइव लॉ की रिपोर्ट में कहा गया है कि याचिकाकर्ता का कहना था कि पब्लिक सेक्टर के बैंकों का १,५३७ करोड़ रुपए का कर्ज दो एआरसी के जरिए सिर्फ ७३.५ करोड़ रुपए में निपटा दिया गया, जिससे जनता के पैसे का भारी नुकसान हुआ। सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि एआरसी, बैंक और कर्ज लेने वालों के बीच एक गहरी मिलीभगत है।
