सामना संवाददाता / मुंबई
‘आपके खिलाफ जांच चल रही है… हम सीबीआई से हैं। ‘अगर कोई अचानक आपको ऐसा कहे, जेब में पहचान पत्र भी हो और आवाज में पूरा रौब, तो शायद आप भी घबरा जाएंगे। अकोला में एक ७० साल के कारोबारी के साथ कुछ ऐसा ही हुआ, लेकिन वो सीबीआई वाला असली नहीं, बल्कि ठग था।
यह घटना १९ जून को शाम ४ से ५ बजे के बीच की है। खामगांव के रहने वाले ७० वर्षीय व्यापारी बालापुर बस स्टैंड पर बस में सवार हुए थे। वे पिको कॉल सेंटर का संचालन करते हैं। कारोबारी बालापुर की बस में सफर कर रहे थे। उनके पास करीब २५ लाख रुपए वैâश थे। बस में एक युवक ने उन्हें पहचान लिया। पहचान इसलिए क्योंकि वो पहले कारोबारी के यहां काम कर चुका था। उसे मालूम था कि मालिक कभी-कभी बड़ी रकम लेकर चलते हैं। यहीं से शुरू हुई पूरी कहानी। आरोपी ने गूगल की मदद से फर्जी सीबीआी आईडी बनाई। फिर कारोबारी के सामने पहुंचा और बोला, आप पर अवैध लेन-देन की जांच चल रही है। आरोप इतने आत्मविश्वास से लगाए गए कि बुजुर्ग कारोबारी को शक तक नहीं हुआ। उनसे कहा गया कि जांच के लिए मोबाइल और पैसों से भरा बैग जमा करना होगा और पुलिस स्टेशन चलना होगा। कहानी को असली बनाने के लिए दूसरा साथी भी एंट्री मारता है। दोनों ने ऐसा माहौल बनाया कि कारोबारी पूरी तरह भरोसा कर बैठे। फिर जैसे ही वो बस से नीचे उतरे, दोनों आरोपी बैग और मोबाइल लेकर रफूचक्कर हो गए। कुछ देर तक कारोबारी पुलिस की गाड़ी का इंतजार करते रहे, लेकिन जब कोई नहीं आया, तब जाकर समझ में आया कि उनके साथ सीबीआई जांच नहीं, बल्कि सीधी-सीधी ठगी हो गई है।
अपराध शाखा ने आरोपियों को किया अरेस्ट
शिकायत बालापुर पुलिस स्टेशन पहुंची और मामला गंभीर था। अकोला की स्थानीय अपराध शाखा ने दोनों को खामगांव से गिरफ्तार किया। इनमें २२ वर्षीय हार्दिक मनोज कुमार गुरबानी और २५ वर्षीय साहिल नंदकिशोर नथ्थानी शामिल हैं। आरोपियों के पास से २५ लाख रुपए वैâश, पीड़ित का मोबाइल फोन, दो बाइक और अन्य सामान सहित कुल २७.५ लाख रुपए का माल जब्त किया है। पुलिस ने यह भी कहा है कि व्यापारी के पास इतनी बड़ी रकम कहां से आई, इसकी जांच के लिए जीएसटी विभाग को पत्र भेजा जाएगा।
