भारतीय एथलेटिक्स के स्वर्णिम सितारे नीरज चोपड़ा ने लंबे अंतराल के बाद प्रतिस्पर्धी मैदान पर शानदार वापसी करते हुए एक बार फिर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया। पीठ की चोट के कारण महीनों तक खेल से दूर रहने वाले नीरज ने दोहा डायमंड लीग २०२६ में ८५.६९ मीटर का सर्वश्रेष्ठ थ्रो कर न केवल अपनी लय हासिल करने के संकेत दिए, बल्कि कॉमनवेल्थ गेम्स २०२६ के लिए भी क्वॉलिफाई कर लिया। कतर की राजधानी दोहा में आयोजित इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता में नीरज की शुरुआत फाउल थ्रो के साथ हुई, लेकिन इसके बाद उन्होंने शानदार वापसी करते हुए दूसरे प्रयास में ८२.७७ मीटर का थ्रो किया और क्वॉलिफिकेशन मानक हासिल कर लिया। तीसरे प्रयास में उन्होंने ८५.६९ मीटर की दूरी तय कर पदक की दौड़ में जोरदार चुनौती पेश की, लेकिन वह महज ०.३० मीटर के अंतर से शीर्ष तीन में जगह बनाने से चूक गए और चौथे स्थान पर रहे। प्रतियोगिता में श्रीलंका के रुमेश पथिरागे ने ८८.६८ मीटर के थ्रो के साथ स्वर्ण पदक जीता।
