मुख्यपृष्ठस्तंभआज टीचर एब्सेंट है...!..शिक्षा की बुनियाद कमजोर करता लोकतंत्र का उत्सव!

आज टीचर एब्सेंट है…!..शिक्षा की बुनियाद कमजोर करता लोकतंत्र का उत्सव!

आज टीचर एब्सेंट हैं… यह सुनते ही अमूमन बच्चों के चेहरे पर खुशी आ जाती है, लेकिन मुंबई के सरकारी और सहायता प्राप्त स्कूलों में आजकल सन्नाटा और मायूसी पसर जाता है। ब्लैकबोर्ड खाली और क्लासरूम में पढ़ाई की जगह सिर्फ शोर या सन्नाटा। वजह? उनके शिक्षक क्लास छोड़कर देश के सबसे बड़े लोकतांत्रिक उत्सव यानी चुनाव ड्यूटी पर तैनात हैं।
मुंबई में चुनावों के दौरान मनपा और सरकारी स्कूलों के हजारों शिक्षकों को मतदान प्रक्रिया, वोटर लिस्ट अपडेशन और पोलिंग ड्यूटी के काम में लगा दिया जाता है। चुनाव आयोग के कड़े नियमों के कारण स्कूलों के पास इन आदेशों को मानने के अलावा कोई चारा नहीं होता।
इसका सीधा और गंभीर असर स्कूली शिक्षा पर पड़ता है
अधूरा सिलेबस: बोर्ड परीक्षाओं के ठीक पहले या सत्र के बीच में शिक्षकों के गायब रहने से बच्चों का सिलेबस पिछड़ जाता है।
अतिरिक्त बोझ: जो शिक्षक स्कूल में बच जाते हैं, उन्हें एक साथ दो-तीन क्लास संभालनी पड़ती हैं, जिससे पढ़ाई की गुणवत्ता गिरती है।
अभिभावकों की चिंता: गरीब और मध्यम वर्ग के परिवारों के बच्चे, जो पूरी तरह सरकारी शिक्षा पर निर्भर हैं, बिना टीचर के पिछड़ रहे हैं।
शिक्षकों और स्कूल यूनियनों का कहना है कि वे देश के प्रति अपनी जिम्मेदारी समझते हैं, लेकिन गैर-शैक्षणिक कार्यों में महीनों तक उलझे रहने से बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ हो रहा है। लोकतंत्र को मजबूत करने की इस प्रक्रिया में, कहीं न कहीं शिक्षा की बुनियाद कमजोर हो रही है। जब तक चुनाव आयोग और शिक्षा विभाग मिलकर इसका कोई वैकल्पिक रास्ता (जैसे रिटायर्ड कर्मचारियों या अन्य विभागों का उपयोग) नहीं निकालते, तब तक ‘आज टीचर एब्सेंट हैं’ का यह बोर्ड बच्चों के भविष्य को धुंधला करता रहेगा।

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