मुख्यपृष्ठस्तंभहोर्मुज से गुजरने वाले जहाजों पर अमेरिका लगाएगा शुल्क!

होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों पर अमेरिका लगाएगा शुल्क!

-ट्रंप का बड़ा बयान, क्या पश्चिम एशिया संघर्ष का खर्च पूरी दुनिया से वसूलने की तैयारी?

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों पर शुल्क लगाने की चेतावनी देकर वैश्विक ऊर्जा बाजारों के सामने नई चिंता खड़ी कर दी है। ट्रंप ने शनिवार, २० जून को कहा कि ईरान के साथ स्थायी समझौता नहीं हुआ तो अमेरिका इस सामरिक समुद्री मार्ग से गुजरने वाले जहाजों से शुल्क वसूलने पर विचार कर सकता है। उन्होंने इसे पश्चिम एशियाई देशों की सुरक्षा के लिए अमेरिका द्वारा निभाई जा रही ‘संरक्षक’ की भूमिका के बदले मिलने वाला भुगतान बताया।
ट्रंप के बयान का सीधा अर्थ यह निकाला जा रहा है कि अमेरिका पश्चिम एशिया में अपने सैन्य अभियान, नौसैनिक तैनाती और समुद्री सुरक्षा पर हुए खर्च का एक हिस्सा अंतरराष्ट्रीय जहाजरानी तथा तेल आयातक देशों से वसूलना चाहता है। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि मौजूदा ६० दिवसीय अंतरिम संघर्षविराम के दौरान शुल्क नहीं लगाया जाएगा। शुल्क की संभावना तभी पैदा होगी, जब अमेरिका और ईरान के बीच चल रही बातचीत किसी अंतिम समझौते तक नहीं पहुंचती।
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे संवेदनशील ऊर्जा मार्गों में से एक है। यहां से वैश्विक तेल और तरलीकृत प्राकृतिक गैस व्यापार का बड़ा हिस्सा गुजरता है। ऐसे में जहाजों पर कोई भी नया अमेरिकी शुल्क तेल की ढुलाई, समुद्री बीमा और मालभाड़े की लागत बढ़ा सकता है। इसका अंतिम बोझ भारत जैसे बड़े तेल आयातक देशों के उपभोक्ताओं पर पेट्रोल-डीजल, रसोई गैस, विमान र्इंधन और परिवहन महंगा होने के रूप में पड़ सकता है। हाल के संघर्ष और मार्ग बंद होने की आशंका के कारण तेल बाजार पहले ही भारी उतार-चढ़ाव देख चुका है। ट्रंप की घोषणा कई कानूनी सवाल भी खड़े करती है। होर्मुज कोई अमेरिकी जलमार्ग नहीं है। इसका एक हिस्सा ईरान और दूसरा ओमान की समुद्री सीमा से जुड़ा है। इसलिए अमेरिका एकतरफा शुल्क किस अंतरराष्ट्रीय अधिकार के तहत लगाएगा, शुल्क कौन वसूलेगा और भुगतान न करने वाले जहाजों पर क्या कार्रवाई होगी, इन प्रश्नों का उत्तर अभी स्पष्ट नहीं है। व्यवहार में ऐसी व्यवस्था लागू करने के लिए अमेरिका को बड़े पैमाने पर नौसैनिक नियंत्रण और सहयोगी देशों का समर्थन चाहिए होगा। ईरान और अमेरिका के बीच तनाव के बीच दोनों पक्ष होर्मुज को खुला रखने को लेकर परस्पर विरोधी दावे कर रहे हैं। अमेरिकी सेंट्रल कमांड का कहना है कि मार्ग खुला है और अमेरिकी सेनाएं नौवहन की निगरानी कर रही हैं। इसके विपरीत ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड ने इसे बंद करने की चेतावनी दी थी।
ट्रंप का संदेश केवल ईरान के लिए दबाव की रणनीति नहीं, बल्कि दुनिया के तेल आयातक देशों के लिए भी चेतावनी है, यदि स्थायी समझौता विफल हुआ तो पश्चिम एशिया में अमेरिकी सैन्य मौजूदगी की आर्थिक कीमत वैश्विक व्यापार और आम उपभोक्ताओं को चुकानी पड़ सकती है।
मेलोनी ने ट्रंप को सुनाई खरी-खोटी
इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस दावे को पूरी तरह मनगढ़ंत बताया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि मेलोनी ने जी-७ शिखर सम्मेलन के दौरान उनके साथ तस्वीर खिंचवाने के लिए ‘गुजारिश’ की थी। ट्रंप ने यह टिप्पणी एक इतालवी टेलीविजन चैनल को दिए साक्षात्कार में की थी। मेलोनी ने शुक्रवार को तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वह ट्रंप की बातों से हैरान हैं और ऐसी कोई घटना हुई ही नहीं। उन्होंने स्पष्ट किया कि न तो उन्होंने और न ही इटली ने कभी किसी के सामने गिड़गिड़ाने की जरूरत महसूस की है। मेलोनी ने कहा कि उनकी लोकप्रियता इटली के हितों की रक्षा करने से बनी है, किसी विदेशी नेता के साथ तस्वीर खिंचवाने से नहीं। इतालवी प्रधानमंत्री ने ट्रंप की विदेश नीति पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति कई बार पश्चिमी देशों के पुराने और भरोसेमंद सहयोगियों की अपेक्षा पश्चिम के विरोधियों के प्रति अधिक सम्मान प्रदर्शित करते हैं। इस विवाद ने दोनों नेताओं के बीच बढ़ती दूरी को सार्वजनिक कर दिया है। कभी वैचारिक सहयोगी माने जाने वाले ट्रंप और मेलोनी के संबंध ईरान संघर्ष तथा इटली के सैन्य ठिकानों के इस्तेमाल जैसे मुद्दों को लेकर हाल में तनावपूर्ण हुए हैं।

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