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करोड़ों खर्च, फिर भी बदहाल शिक्षा व्यवस्था…‘स्कूल दत्तक योजना’ से सरकारी स्कूलों को बचाने की कवायद!

-मनपा स्कूलों की दुर्दशा ने खोली दावों की पोल

सुरेश गोलानी / मुंबई

पिछले कुछ वर्षों में करोड़ों रुपए पानी की तरह बहाने के बाद भी जब मीरा-भायंदर महानगरपालिका अपने शिक्षण विभाग के माध्यम से संचालित विद्यालयों में शिक्षा के गिरते स्तर और सुविधाओं को सुधार नहीं पायी तो लाचार प्रशासन अब निजी शैक्षणिक संस्थाओं के मार्फत ‘स्कूल दत्तक योजना’ (एडॉप्ट ए स्कूल) को कार्यान्वित करने के बारे में विचार करने लगा है। इस योजना के बारे में विचार-विमर्श करने हेतु शुक्रवार को एक बैठक आयोजित की गई, जिसमें मनपा अधिकारी, पदाधिकारी, शहर की विभिन्न निजी शैक्षणिक संस्थानों के ट्रस्टी, संस्थापक और प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। मनपा अधिकारियों के अनुसार, इस योजना का उद्देश्य मनपा स्कूलों में निजी स्कूलों के समान गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना, विद्यार्थियों को आधुनिक एवं तकनीक आधारित शिक्षण सुविधाएं उपलब्ध कराने तथा सर्वांगीण विकास करने का है। इस बैठक में हिस्सा लेने वाले प्रतिनिधियों ने पारंपरिक शिक्षा से हटकर रचनात्मकता, शैक्षणिक गुणवत्ता में सुधार, डिजिटल शिक्षा का विस्तार, आधुनिक शिक्षण पद्धतियों का उपयोग, विद्यार्थियों के कौशल विकास के लिए इनोवेशन आधारित कार्यक्रम, खेल एवं सांस्कृतिक गतिविधियों को बढ़ावा, स्कूलों का भौतिक आधारभूत संरचना का विकास तथा प्रभावी शैक्षणिक प्रबंधन जैसे विषयों पर सुझाव और प्रस्ताव प्रस्तुत किए। ज्ञात हो कि शहर में मनपा के स्वामित्व वाली १८ इमारतों में कुल ३५ स्कूल कार्यरत हैं, जिनमें लगभग १०,२०० छात्रों को दसवीं कक्षा तक मराठी, उर्दू, हिंदी, गुजराती और सेमी-इंग्लिश माध्यम से शिक्षा प्रदान की जाती है। इन स्कूलों में अधिकतर आर्थिक रूप से कमजोर और गरीब परिवारों के विद्यार्थी शिक्षा ग्रहण करते हैं। शिक्षा व्यवस्था में सुधार को लेकर किए जाने वाले मनपा के तमाम दावे अक्सर जमीनी हकीकत से कोसों दूर होते हैं। यही वजह है कि मनपा द्वारा संचालित स्कूल आज भी बुनियादी सुविधाओं की कमी, शिक्षकों के रिक्त पदों और कमजोर शिक्षण व्यवस्था जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं। इसका सीधा असर विद्यार्थियों की पढ़ाई, सीखने की क्षमता और उनके भविष्य पर पड़ रहा है।
बुनियादी सुविधाएं नदारद
करोड़ों रुपए खर्च के बावजूद मीरा-भायंदर मनपा अपने स्कूलों की शिक्षा गुणवत्ता और बुनियादी सुविधाओं में सुधार करने में नाकाम रही है। गिरते स्तर और शिक्षकों की कमी के बीच अब प्रशासन निजी संस्थाओं के सहारे ‘स्कूल दत्तक योजना’ लागू करने पर विचार कर रहा है।
निजी हाथों में उम्मीद की किरण
‘स्कूल दत्तक योजना’ के तहत निजी शैक्षणिक संस्थाओं की मदद से मनपा स्कूलों में आधुनिक, तकनीक-आधारित और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने की तैयारी है। बैठक में डिजिटल शिक्षा, कौशल विकास और आधारभूत ढांचे के सुधार जैसे सुझावों पर चर्चा की गई।

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