-सरनाईक की नाकामी, तीसरे दिन भी शहर जाम
-आक्रोश में अवाम, व्यवस्था नहीं संभाल पा रही सरकार
-१०० बसों का दिखावा, नीट छात्रों के साथ धोखा
`नीट छात्रा सुरेखा मिश्रा ने बताया कि परीक्षा देने के लिए वह पिता के साथ सुबह ही निकल गई थी। सुना था छात्रों को लिए १०० स्पेशल बसें चलाई जा रही हैं, लेकिन बस कहीं नजर नहीं आई तो वह ऑटो से सेंटर पहुंची। ‘
फिरोज खान / मुंबई
शहर में तीसरे दिन भी बेस्ट बसों की हड़ताल जारी रही। हड़ताल के कारण लाखों यात्रियों को भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ा। हड़ताल पर सरकार की लाचारी और मौन पर अवाम आक्रोश में नजर आने लगी है। जनता का कहना है कि बीजेपी सरकार चलाने आई है या मुंबई को बंद कराने। नीट का पेपर लीक होने से छात्र पहले से ही बुरी तरह टूटे हुए हैं। वहीं परीक्षा वाले दिन छात्रों के साथ बड़ा धोखा हुआ। रविवार को शहर में नीट के री-एग्जाम में शामिल होनेवाले स्टूडेंट्स की मदद के लिए १०० से ज्यादा बसों का इंतजाम करने का दावा किया गया था, बावजूद इसके लाखों छात्रों को उबर, टैक्सी और ऑटो के लिए जद्दोजहद करनी पड़ी। इसके अलावा ऑटो और टैक्सी चालकों ने डबल किराया लेकर लोगों को लूटा। काफी छात्रों का सेंटर अंधेरी, बोरीवली, मालाड, परेल आदि जगहों पर थे।
बेस्ट हड़ताल से लाखों यात्री हलाकान
बेस्ट की हड़ताल की वजह से तकरीबन २५ लाख यात्रियों को मुसीबतों का सामना करना पड़ रहा है। एक और यात्री अजय शर्मा का कहना है कि बीजेपी सरकार चलाने आई है या मुंबई बंद करवाने आई है। एक और यात्री ने कहा कि परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ३ दिन बाद भी हड़ताल खत्म करवाने में नाकाम रहे। महाराष्ट्र इसेंशियल सर्विस एंड मेंटिनेंस एक्ट (मेस्मा) जैसा कड़ा कानून लगाया, कोर्ट का स्टे ऑर्डर लिया, फिर भी एक भी बस सड़क पर नहीं उतार पाए। ये बीजेपी सरकार की प्रशासनिक विफलता है। हड़ताल के दौरान हिंसा और अराजकता हुई। कुछ बसें निकालने की कोशिश के दौरान पत्थरबाजी हुई ड्राइवर और कंडक्टर डर के कारण डिपो में भागना पड़ा। सरकार न सुरक्षा दे पाई, न हड़ताल तुड़वा पाई। पुलिस के मुताबिक, अब तक ११ लोगों के खिलाफ मामले दर्ज किए गए हैं और २३ लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है।
बता दें कि बेस्ट मुंबई की दूसरी लाइफलाइन कही जाती है। रोजाना २,७६६ बसें २५ लाख यात्रियों को सेवा देती हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, हड़ताल में ९९.८ प्रतिशत बसें बंद रही हैं।
सरकार का रवैया तानाशाहीपूर्ण
यूनियन की मांग है कि बेस्ट का बजट मनपा में विलय हो। ७वां वेतन आयोग लागू करो, रिटायर्ड कर्मचारियों का पैसा दो, कॉन्ट्रैक्ट-वेट लीज खत्म करो। ये मांगें सालों से पेंडिंग हैं। यूनियन बातचीत को तैयार, पर सरकार साफ वादा नहीं कर रही है। सरकार का रवैया तानाशाहीपूर्ण है।
