सामना संवाददाता / नई दिल्ली
मेडिकल प्रवेश परीक्षा री-नीट २०२६ शुरू होते ही परीक्षा केंद्रों से तरह-तरह की खबरें सामने आने लगी थीं। सुरक्षा जांच के नाम पर कई जगह ऐसी सख्ती देखने को मिली, जिसने छात्रों और अभिभावकों की परेशानी बढ़ा दी। परीक्षा से पहले किए गए दावों और जमीनी हकीकत के बीच फर्क को लेकर अब सवाल उठने लगे हैं, जिससे कुछ परीक्षा केंद्रों पर विवाद की स्थिति बन गई है।
दावे धरे के धरे रहे, सुरक्षाकर्मियों ने चलाई कैंची
गुरुग्राम के कादीपुर सीनियर सेकेंडरी स्कूल और सेक्टर-९ के गवर्नमेंट कॉलेज से एक चौंकाने वाली तस्वीर सामने आई है। परीक्षा केंद्रों पर तैनात सुरक्षाकर्मी नियमों के आगे इतने लकीर के फकीर बन गए कि उन्होंने छात्रों की आस्था की भी परवाह नहीं की।
चेकिंग के नाम पर मनमानी!
परीक्षा देने आए छात्रों और उनके अभिभावकों में इस बात को लेकर भारी रोष है। उनका कहना है कि सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करना सही है, लेकिन चेकिंग के नाम पर इस तरह आस्था को ठेस पहुंचाना कहां तक जायज है? इसके बाद से कई बड़े सवाल खड़े हो रहे हैं।
सख्त नियम या अंधा कानून?
नीट परीक्षा में नकल रोकने के लिए ड्रेस कोड और चेकिंग के बेहद सख्त नियम लागू होते हैं, यह सब जानते हैं, लेकिन मेटल डिटेक्टर और आधुनिक तकनीक के इस दौर में, क्या एक धागे या रुद्राक्ष से भी नकल का खतरा था? जब प्रशासन ने पहले ही धार्मिक भावनाओं का सम्मान करने का भरोसा दिया था तो ऐन वक्त पर सुरक्षाकर्मी इतने संवेदनहीन क्यों हो गए?
-गले से उतरवाए रुद्राक्ष: परीक्षार्थियों के गले में सजे पवित्र रुद्राक्ष को जबरन उतरवाकर टेबल पर रख दिया गया।
-काटे गए मन्नत के धागे: छात्रों की कलाइयों पर बंधे लाल-काले और मन्नत के धागों को सुरक्षाकर्मियों ने वैंâची से काट डाला।
-मेज पर बिखरी आस्था: परीक्षा केंद्र के प्रांगण में रखी एक मेज इस पूरे घटनाक्रम की गवाह बनी हुई है। इस मेज पर चारों तरफ लाल-काले मन्नत के धागे और रुद्राक्ष कटे हुए रखे हैं। ये वो धागे हैं, जिन्हें माता-पिता ने अपने बच्चों की कामयाबी और सुरक्षा के लिए दुआएं मांगकर बांधा था, लेकिन परीक्षा हॉल के मुख्य दरवाजे पर इन्हें सुरक्षा कारणों के लिए काट दिया गया।
