‘स्मोकस्क्रीन’ के पीछे आतंक का खेल
टेरर टेक्नोलॉजी के आगे फडणवीस की पुलिस फेल
फिरोज खान / मुंबई
मुंबई में आए दिन कभी मुख्यमंत्री कार्यालय, कभी मनपा मुख्यालय, हाई कोर्ट या कभी एयरपोर्ट को बम से उड़ाने धमकी भरे मेल आते रहते हैं। धमकी मिलते ही पुलिस, एटीएस, बम निरोधक दस्ता एक्टिव हो जाते हैं और धमकी की जगहों को छान मारते हैं और कुछ नहीं मिलता है। फिर शुरुआत होती है मेल भेजनेवाले का पता लगाना की, यहीं पुलिस जांच आकर अटक जाती है जब उन्हें स्मोकस्क्रीन नजर आने लगता है।
एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया स्मोकस्क्रीन के पीछे आतंक छुपा है, लेकिन मुंबई पुलिस को वहां तक पंहुचना मुश्किल ही नहीं, नामुमकिन नजर आता है। अधिकारी के मुताबिक, इसकी खास वजह यह है कि आतंकी टेक्नोलॉजी में पुलिस से १० कदम आगे हैं। पुलिस अधिकारी ने बताया कि वर्चुअल प्राइवेट नेटवर्क (वीपीएन) आतंक का कवच बना हुआ है। जांच में आईपी एड्रेस यूरोप, अमेरिका, पुर्तगाल तक मिले, पर पुलिस मानती है ये सब स्मोकस्क्रीन है। असली भेजनेवाला वीपीएन के पीछे छुपा है। वीपीएन कंपनी को मेल करो तो जवाब नहीं मिलता है। पारस्परिक कानूनी सहायता संधि के तहत विदेशी सरकार से मदद मांगों तो सालों लग जाते हैं। पुलिस अधिकारी ने बताया यही वजह है कि धमकी भरा मेल मिलने पर पुलिस अनसुलझी एफआईआर से बचने के लिए नॉन-कॉग्निजेबल (एनसी) दर्ज करके पल्ला झाड़ लेती है।
१,१०० से अधिक मिले धमकी भरे फर्जी ईमेल
मार्च २०२६ में १,१०० से अधिक फर्जी ईमेल प्राप्त हुए, जिसमें १२ मार्च को नेशनल स्टॉक एक्सचेंज को मिसाइल अटैक की चेतावनी शामिल है। १० जून २०२६ को मनपा मुख्यालय, मेयर, मुख्यमंत्री कार्यालय व बीएसई को बम से उड़ाने के एक साथ ईमेल मिले थे। धमकी पर धमकी, एक्शन जीरो नतीजा क्या, गिरफ्तारी एक भी नहीं और पुलिस के हाथ खाली। एक पुलिस अफसर ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि सरकार को चाहिए कि पुलिस को एडवांस टेक्नोलॉजी की ट्रेनिंग दे, तभी इस तरह के अपराध और सायबर क्राइम पर काबू पाया जा सकता है।
