मुख्यपृष्ठसंपादकीयसंपादकीय :  शिंदे फिर से ‘प्रसूता' हुए; छह गद्दार पैदा हुए!

संपादकीय :  शिंदे फिर से ‘प्रसूता’ हुए; छह गद्दार पैदा हुए!

महाराष्ट्र के सामने अनगिनत सवाल मुंह बाए खड़े हैं। उन सवालों की चिंता सरकार के चेहरे पर रत्ती भर भी नजर नहीं आती। विधानमंडल के मानसून सत्र की पूर्व संध्या पर फडणवीस, शिंदे, सुनेत्रा पवार एक साथ आए। वैसे तो फडणवीस और शिंदे-मिंधे गुट में आपसी मतभेद हैं ही, लेकिन कल जारी हुई उनकी तस्वीर भी इसी बात की गवाही दे रही है। फडणवीस जब बोल रहे थे, तब शिंदे दूसरी तरफ देख रहे थे। मुख्यमंत्री फडणवीस को महाराष्ट्र के मुद्दों पर बोलना चाहिए था, लेकिन वे बोले शिवसेना में हुई गद्दारी पर। ‘गद्दारी’ सफल होने पर फडणवीस ने संतोष जताया। मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘गद्दारी का ऑपरेशन सफल रहा और मरीज की हालत ठीक है।’’ संक्षेप में उनका कहना था कि शिंदे प्रसूता हुए और उन्होंने एक साथ छह तंदुरुस्त गद्दारों को जन्म दिया। यह प्रसव सामान्य नहीं था। इसे सफल बनाने के लिए कम से कम ५०० करोड़ रुपए खर्च हुए। अब इन बच्चों के असली बाप कौन हैं, इस पर संशोधन चल रहा है। शिंदे ने छह गद्दारों को जन्म दिया, इस पर फडणवीस ने खुशी जताई। दिल्ली में अमित शाह भी पेड़े बांट रहे हैं। महाराष्ट्र में कभी स्वाभिमानी छत्रपति शिवराय का नाम लेते ही गद्दारों के पसीने छूट जाते थे। लेकिन अब शिवराय के स्वाभिमानी विचारों की लकीर छोटी करके गद्दारी की लकीर बड़ी करने का आनंद फडणवीस ले रहे हैं। गद्दारी ही महाराष्ट्र की पहचान बन गई है। महाराष्ट्र के सामने सवालों का पहाड़ खड़ा है, फिर भी फडणवीस
गद्दारों की तारीफ में संतोष
जता रहे हैं, यह ठीक नहीं है। बारिश लंबी खिंचने के कारण पानी की भारी किल्लत का संकट खड़ा हो गया है। इसके चलते जल्द ही ग्रामीण जनता का पलायन होगा। किसानों के मवेशियों के चारे-पानी का सवाल खड़ा हो जाएगा, लेकिन शिवसेना के छह सांसदों को पचास-सौ करोड़ में तोड़ने से उसका फायदा ग्रामीण इलाकों के सूखाग्रस्त किसानों को मिलेगा, शायद श्री फडणवीस को ऐसा लगता होगा। मुंबई को पानी की आपूर्ति करने वाले सात बांधों में पानी का भंडार साढ़े आठ फीसदी पर आ गया है। राज्य के अन्य हिस्सों में बांध, तालाब, जलाशय भी सूख गए हैं। पेड़-पत्ते झुलस गए हैं। पानी की कटौती शुरू हो चुकी है। लोगों के गले अभी से सूख रहे हैं, लेकिन छह गद्दार सांसदों का ‘फोटो-सेशन’ हो और शिंदे का प्रसव सकुशल होने की खबर उछाली जाए, इसके लिए पैसों की बारिश की जा रही है। सवाल तो ‘नीट’ पेपर लीक का भी है ही। ‘नीट’ पेपर लीक का केंद्र महाराष्ट्र में है और राज्य से इस मामले में जो लोग पकड़े गए वे भाजपा परिवार के हैं। युवाओं के भविष्य से महाराष्ट्र की भाजपा ने खिलवाड़ किया है। इस एक मुद्दे पर विपक्ष को विधानसभा का सत्र ठप कर देना चाहिए। फडणवीस से जवाब तलब किया जाना चाहिए, ऐसा यह मामला है। राज्य में किसानों की कर्जमाफी पर अब भी सवालिया निशान है। फडणवीस ने एलान किया कि किसानों की कर्जमाफी स्थायी समाधान नहीं है, लेकिन फिर किसानों को सक्षम कैसे करेंगे? किसानों की फसल को न्यूनतम समर्थन मूल्य मिलना चाहिए और
फसल बीमा योजना का
लाभ सही तरीके से मिलना चाहिए। मगर ऐसा नहीं हो रहा। ‘विधायक-सांसद’ ही फिलहाल ‘माल’ बन गए हैं और इस ‘माल’ को जोरदार भाव मिल रहा है। इसके लिए सत्ताधारी दलों के पास बेतहाशा पैसा है, लेकिन किसानों को इन लोगों ने भगवान भरोसे छोड़ दिया है। किसानों की आत्महत्याएं रुकी नहीं हैं। फिर फडणवीस-मिंधे की सरकार किस काम की? विदर्भ, मराठवाड़ा सूखे के संकट में हैं। बेरोजगारी, कानून-व्यवस्था की स्थिति गंभीर है। लाड़ली बहनों के साथ धोखा रुका नहीं है। ८१ लाख लाड़ली बहनों का पैसा बंद कर दिया गया है। चुनाव खत्म होते ही शासकों ने बहनों को भगवान भरोसे छोड़ दिया। लोकतंत्र में विपक्ष के नेता का स्थान महत्वपूर्ण होता है। आज महाराष्ट्र के दोनों विधायी सदनों में विपक्ष का नेता नहीं है। क्योंकि विपक्ष का नेता सरकार को बेनकाब करता है, सवाल पूछता है, ऐसा डर सत्ताधारियों को है। यह लोकतंत्र का पतन है। मिंधे, फडणवीस की भ्रष्ट सांठ-गांठ के कारण महाराष्ट्र २५ साल पीछे धकेल दिया गया है। राज्य की प्रतिष्ठा मिट्टी में मिल गई है। शिंदे की राजनीति, पैसे का घमंड एक दिन फडणवीस को भी मुश्किल में डालेगा। क्योंकि दिल्ली के एक गुट की फडणवीस के खिलाफ मिंधे को खुली शह है, यह जाहिर हो चुका है। महाराष्ट्र के सवालों को हवा में छोड़कर मुख्यमंत्री फडणवीस मिंधे के प्रसव पर बोलते हैं और पेड़े बांटते हैं। मिंधे ‘प्रसूता’ हुए। उन्हें छह गद्दार हुए। अब उन गद्दारों के असली मां-बाप कौन हैं? इतना तो मुख्यमंत्री को घोषित कर ही देना चाहिए।

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