सामना संवाददाता / मुंबई
महाराष्ट्र विधानमंडल के मानसून सत्र के पहले ही दिन शिवसेना नेता व विधायक आदित्य ठाकरे ने भाजपा तथा राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा समाज में दंगा कराने की गंदी राजनीति करती है, उसे सरकार चलाना नहीं आता है। जनहित के मुद्दों पर यह सरकार पूरी तरह से फेल रही है। विधान भवन परिसर में पत्रकारों से बातचीत करते हुए आदित्य ठाकरे ने महायुति सरकार को जमकर आड़े हाथों लिया।
संविधान बदलना चाहती है भाजपा…इसलिए तोड़ रही है सांसद
संविधान बदलने के लिए भाजपा सांसदों को तोड़ रही है। ऐसा गंभीर आरोप लगाते हुए आदित्य ठाकरे ने कहा कि अगर न्याय प्रक्रिया है तो निश्चित ही इन गद्दारों को अपात्र ठहराएगी। उन्होंने कहा कि जनता के पैसे से बनाई जा रही परियोजना में बड़ा भ्रष्टाचार है और वह काला पैसा भाजपा पार्टियों को तोड़ने के लिए कर रही है।
उन्होंने कहा कि सरकार का ध्यान जनता की समस्याओं के समाधान के बजाय राजनीतिक दलों और जनप्रतिनिधियों को तोड़ने में है। उन्होंने कहा कि महिलाओं, किसानों और सार्वजनिक सेवाओं से जुड़े कई मुद्दे अब भी लंबित हैं, जबकि राजनीतिक कारणों से सरकारी संसाधनों का दुरुपयोग किया जा रहा है।
गद्दारी करनेवाले सांसदों और नेताओं के मुद्दे पर आदित्य ठाकरे ने स्पष्ट कहा कि असली शिवसेना एक ही है और वह उद्धव ठाकरे के नेतृत्व में काम कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी छोड़नेवाले नेता सत्ता और राजनीतिक लाभ के लालच में दूसरी ओर जा रहे हैं। वह बिकाऊ और भाजपा के गुलाम हैं। आदित्य ठाकरे ने कहा कि शिवसेना ने उन्हें हमेशा सम्मान और समर्थन दिया, लेकिन कुछ नेताओं ने निधि के लिए नहीं अपनी जेब भरने के लिए गद्दारी का रास्ता चुना है। उन्होंने कहा कि ऐसे नेताओं के बारे में अंतिम पैâसला जनता ही करेगी। उन्होंने कहा कि इतने सालों तक शिवसेना परिवार उनके साथ खड़ी रहा और अब खुद के नाम और परिवार का सौदा करना दुर्भाग्यपूर्ण है।
उन्होंने कहा कि मुंबई में इतना अधिक पानी की कटौती इतिहास में पहली बार हुई है। कई इलाकों में दूषित पानी पहुंच रहा है। उन्होंने दावा किया कि मुंबई, पुणे और अन्य शहरों में पानी और बिजली से जुड़ी समस्याएं बढ़ रही हैं, जबकि सरकार इन मुद्दों पर गंभीर नहीं दिखाई दे रही है। महाविकास आघाड़ी सरकार के दौरान प्रस्तावित समुद्री जल को मीठा बनाने की परियोजना पूरी हुई होती तो मुंबई में पानी की कटौती की ऐसी स्थिति नहीं होती।
