मुख्यपृष्ठनए समाचारअब एआई पर अमेरिका की ‘दादागिरी’!

अब एआई पर अमेरिका की ‘दादागिरी’!

-दुनिया के लिए बंद किए टॉप मॉडल्स

– भारत के लिए खतरे की घंटी

एजेंसी / वॉशिंगटन

एआई स्पेस में अमेरिका की मोनोपॉली या यूं कहें कि दादागीरी चल रही है! दुनियाभर में इस समय इस बात की चर्चा है कि क्या आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस किल स्विच अमेरिका के हाथ में है? अगर ऐसा है तो ये भारत सहित दुनिया भर के लिए खतरे की घंटी से कम नहीं है।
दूसरे देशों के लिए ब्लॉक करा दिए पावरफुल एआई मॉडल्स
अमेरिकी ट्रंप सरकार चाहती है कि अमेरिकी कंपनियां एडवांस्ड एआई टूल्स दूसरे देशों को न दें। हाल ही में ट्रंप सरकार ने एंथ्रोपिक के दो पावरफुल एआई मॉडल्स को दूसरे देशों के लिए ब्लॉक करा दिए हैं। यानी भारत के लोग पैसे दे कर भी एंथ्रोपिक का पावरफुल मॉडल यूज करना चाहें तो भी नहीं कर सकेंगे। सिर्फ वही मॉडल एवेलेबल होगा, जिससे अमेरिका को लगता है कि उनका नुकसान न हो।
एनवीडिया इस वक्त दुनिया की सबसे बड़ी चिपसेट कंपनी है और ऐपल को पीछे छोड़ चुकी है। चूंकि ये भी अमेरिका की कंपनी है इसलिए एनवीडिया अपने बेस्ट एआई चिपसेट (जीपीयू) किसी दूसरे देश को नहीं देती है। ये भी अमेरिकी सरकार की तरफ से स्पष्ट किया गया है। ओपन एआई से लेकर एंथ्रोपिक तक, दुनिया की बड़ी एआई कंपनियां अमेरिकी हैं। इन कंपनियों के बनाए गए एआई मॉडल्स को अमेरिका वॉर में यूज करता है। हाल ही में ईरान पर अटैक के दौरान ओपन एआई और एंथ्रोपिक के मॉडल्स यूज किए गए हैं। दुनिया तेजी से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की तरफ बढ़ रही है। जो देश एआई में आगे है, वही आनेवाले समय में ताकतवर माना जाएगा। हाल के दिनों में जो घटनाएं सामने आई हैं, उन्होंने इस बहस को और अधिक तेज कर दिया है।

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