भाजपा के राज में देश के प्रमुख मंदिरों की लूट जारी है। उसमें अयोध्या के राम मंदिर और उज्जैन के महाकाल मंदिर का समावेश है। इसके अलावा जम्मू के वैष्णोदेवी मंदिर में ५५० करोड़ का चांदी घोटाला, सबरीमाला मंदिर में सोने की चोरी का घोटाला, तिरुपति के वेंकटेश्वर मंदिर में २५० करोड़ का लड्डू घोटाला जैसे मामलों ने भाजपा के हिंदुत्व का मुखौटा उतार दिया है। इतिहास काल में मुगलों ने मंदिर लूटे। उसका ठीकरा आज के मुसलमानों पर फोड़ा जाता है, लेकिन मुगल भी अचंभित हो जाएं या मुगल ‘संत’ लगें, इस तरह से श्रीराम मंदिर से लेकर उज्जैन के महाकाल मंदिर तक के मामले सामने आए हैं। उज्जैन हिंदुओं का एक श्रद्धा स्थल है और लाखों हिंदू वहां पूजा, मन्नत-आदि के लिए जाते हैं। प्राचीन उज्जैन नगरी को ‘स्मार्ट सिटी’ बनाने के लिए मध्य प्रदेश भाजपा सरकार ने विकास का मास्टर प्लान तैयार किया। उसमें सामने आया कि विकास होने के बाद आज की कौड़ी के मोल वाली जमीनों को सोने का भाव मिल जाएगा। इसी मंशा से मुख्यमंत्री मोहन यादव के परिवार वालों ने इस ‘मास्टर प्लान’ इलाके में १६८ एकड़ भूखंड करोड़ों में खरीद लिए। मुख्यमंत्री की पत्नी, बहू, भाई, बहनें, भतीजे ऐसे पूरे परिवार ने उज्जैन नगरी को लूट लिया। मानो इस परिवार को आर्थिक लाभ पहुंचाने के लिए ही मंदिर विकास का मास्टर प्लान तैयार किया गया था। हिंदुत्व के नाम पर चल रही यह लूट गजनी के महमूद से भी भयानक है। मुगलों ने हिंदुओं के मंदिर लूटे। इस पाप का दाग भाजपा के भ्रष्ट हिंदुत्ववादियों ने धो डाला है। राम मंदिर में
दान और दानपात्रों की चोरी का मामला
तो और भी चौंकाने वाला है। कुछ दशक पहले भाजपा ने ‘गंगाजल’ की बोतलें बेचकर करोड़ों रुपए जुटाए थे। उसका हिसाब कभी नहीं दिया गया। उसके बाद राम मंदिर के लिए चंदे की चोरी ‘कारसेवा’ के दौर से ही शुरू हो गई। अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण शुरू होने से पहले जमीन का अधिग्रहण किया गया। इस दौरान भाजपा से जुड़े लोगों ने आनन-फानन में सस्ते दामों पर जमीनें खरीदीं और वही जमीनें ऊंचे दामों पर राम मंदिर ट्रस्ट को बेच दीं। उससे करोड़ों का हेर-फेर किया गया। जिस रामजन्मभूमि के लिए सैकड़ों लोगों ने खून बहाया, प्राण त्यागे, उसी जमीन का धंधा भाजपा के लोगों ने खुलेआम किया। अब मंदिर बनने के बाद यह पूरा प्रोजेक्ट ही चोर-डकैतों का अड्डा बन गया है। राम मंदिर में आने वाला चंदा भाजपा के एक गुट के लिए कमाई का जरिया बन गया है। ये चोर दूसरे-तीसरे कोई नहीं, बल्कि हिंदुत्व का व्यापार करने वाले भाजपाई हैं। राम मंदिर में अब तक १,४०० करोड़ का घोटाला सामने आया। मोदी के दौर में राम मंदिर निर्माण के हर चरण में चोरी, कमीशनखोरी के आरोप लगते रहे हैं। प्रोजेक्ट के सूत्रधारों ने हर जगह २५ फीसदी कमीशन लिया, इसके सबूत सामने आए। राम मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष नृत्यगोपाल दास के उत्तराधिकारी महंत कमल नयनदास कहते हैं, ‘‘राम मंदिर में चोरी के मामले की जांच होनी चाहिए, लेकिन जांच करे कौन? एक से बढ़कर एक सब बेईमान हैं। अयोध्या में अब कोई भी धुले चावल जैसा नहीं है।’’ ये एक संत के उद्गार हैं। यह मामूली मामला नहीं है। सैकड़ों लोगों ने इस
रामजन्मभूमि के लिए शहादत
दी। कल्याण सिंह ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था और उनकी सरकार ही बर्खास्त हो गई थी। रामजन्मभूमि आंदोलन में कई लोगों ने त्याग किया है, बलिदान दिया है, लेकिन इस पूरे त्याग-बलिदान के बूते निर्माण हुआ यह राम मंदिर चोरों के हाथ में चला गया है। अब यहां तो कोई महमूद गजनवी नहीं है। फिर हिंदुओं के मंदिर कौन लूट रहा है और भाजपा इस पर चुप क्यों बैठी है? मंदिर के सारे कर्मचारी भाजपा के ही कार्यकर्ता और पदाधिकारी हैं। मंदिर निर्माण के दौरान १,२५० ‘रामशिला’ चोरी हो गर्इं। ये कीमती शिलाएं मॉरीशस से लाई गई थीं और उन पर सोने का मुलम्मा था। हजार से ज्यादा स्वर्ण-शिला गायब हो गर्इं। जहां-जहां हिंदुत्व का मुद्दा आया, वहां चोरियां हुर्इं। गंगा सफाई प्रोजेक्ट में हजारों करोड़ ठेकेदारों ने खा लिए। प्रयागराज कुंभ मेले में गुजरात के ठेकेदारों ने लूट की। अब नासिक कुंभ मेले की लूट के लिए भी गुजरात के ही ठेकेदार जुट गए हैं। अंग्रेज और मुगल आक्रांताओं से ज्यादा देश के मंदिरों की लूट भाजपा काल में हुई है। मंदिर भाजपा के ही लोग लूट रहे हैं, लेकिन जल्द ही खबर आएगी कि अयोध्या और उज्जैन की लूट के पीछे पाकिस्तान की साजिश है। हिंदुओं को, मंदिरों को बदनाम करने की ‘साजिश’ पाकिस्तान में रची गई है। राम मंदिर के ‘ट्रस्टी’ चंपत राय रोज दूध से नहाते हैं, लेकिन पाकिस्तानी लोगों ने उनके दूध में मिलावट कर चंपतमियां को अपवित्र कर दिया है। भाजपा के महमूद गजनवी मंदिर लूट रहे हैं, हिंदुत्व की धज्जियां उड़ा रहे हैं। श्रीरामा, अब तू ही देख ले यह सब!
