पीठ पीछे बतियाएंगे, मुंह पर मुस्कुराएंगे।
साथ देने का वादा करके, जरूरत पर छुप जाएंगे।
ऐसे लोग, लोग कहलाते हैं।
सामने दिल बहलाते हैं, पीछे बदनाम कर जाते हैं।
यूं तो बद अच्छा, बदनाम बुरा होता है,
जैसे कैंची से कहीं अच्छा छुरा होता है।
दोनों ही के अलग-अलग काज होते हैं,
पर ये लोग बड़े दगाबाज होते हैं।
छोटी-छोटी उपलब्धियों पर इतराते हैं,
इन्हें लगता है, जाने क्या-क्या कमाते हैं।
आपस में लोग अनायास भिड़ते हैं,
क्या ही कहें, किस-किस बात पर उड़ते हैं।
सुख और दुःख में बड़े काम आते हैं,
ये लोग बस भीड़ बढ़ाते हैं।
मैंने देखा था एक बिचारे को लोकल ट्रैक पर,
आंसू आए थे उसका कटा हाथ देखकर।
वहां भी लोग थे, सर झुकाए हुए,
सेल्फी लेते हुए, गैर-जिम्मेदाराना,
जिनके लिए मुश्किल था पुलिस को बुलाना।
पैसे दो, तो देखो बड़ी भीड़ आती है,
नेताओं को बड़े-बड़े नाम दे जाती है।
संक्षिप्त में कहें, तो ये लोग बड़ी चीज हैं,
अनपढ़ भारत के किस्मत की ताबीज हैं।
-अनुराधा सिंह
