-बेटे को याद कर फूट-फूटकर रोई मां
-सिस्टम पर उठाए सवाल
उत्तर प्रदेश के सीतापुर जनपद के बिसवां कस्बे में उस समय मातम छा गया, जब लखनऊ के भीषण अग्निकांड में जान गंवाने वाले आदित्य श्रीवास्तव का शव उनके पैतृक निवास पहुंचा। शव के पहुंचते ही परिवार के साथ-साथ पूरे मोहल्ले में कोहराम मच गया। लखनऊ कोचिंग अग्नि कांड में मृतक आदित्य की मां कल्पना श्रीवास्तव के आंसू रुकने का नाम नहीं ले रहे हैं। रोते हुए मीडिया और सिस्टम के सामने अपना दर्द और गुस्सा जाहिर किया। साथ ही कहा कि अगर उसे चोट या जलन भी आई होती, तो हम उसे पाल लेते। वह बिस्तर पर रहता तो भी मैं उसकी देखभाल करती, उसे बाथरूम तक ले जाती। लेकिन व्यवस्था सही नहीं थी।
बता दें कि लखनऊ कोचिंग अग्निकांड में मृतक आदित्य की मां कल्पना श्रीवास्तव के आंसू रुकने का नाम नहीं ले रहे हैं। रोते हुए मीडिया और सिस्टम के सामने अपना दर्द और गुस्सा जाहिर किया। ‘मेरे भैया में सब अच्छाइयां ही थीं। वह दिल का बिल्कुल बुरा नहीं था, हमेशा सच बोलता था। ६ मई को वह घर से गया था, फिर बीच में २३-२४ मई के आस-पास घर आया था। सोमवार का मंजर बहुत भयानक था। चारों तरफ सिर्फ काला धुआं था। लोग कह रहे थे बच्चे बच जाएंगे, लेकिन मैं जानती थी कि इस काले धुएं में बच्चे वैâसे बचेंगे? वही हुआ जिसका डर था।’
…तो बच जाता मेरा बच्चा
मां ने सिस्टम की पोल खोलते हुए कहा, `पूरी तरह लापरवाही हुई है। मेरी मीडिया से अपील है कि आधी-अधूरी बातें मत दिखाइए, जो सच बोला जाता है उसे काट दिया जाता है। अगर वहां दमकल की गाड़ियां और फोर्स समय पर होती, तो आज मेरा बच्चा जिंदा होता।
`बस मेरा बेटा लौटा दो’
सहायता राशि के सवाल पर मां फूट पड़ीं और बोलीं, `मेरा भैया अभी २५ साल का भी नहीं हुआ था। आप लोग बताइए हम वैâसे रहेंगे? कहां जा रहा है सहायता राशि दी जा रही है। क्या वो रुपया मेरा बेटा वापस ला देगा? हमारा सब ले जाओ, बस मेरा बेटा लौटा दो।’
