– १ पुलिसवाले पर २००० लोगों की जिम्मेदारी
– जीआरपी स्टाफ जवानों की भारी कमी
फिरोज खान / मुंबई
मुंबई की लोकल ट्रेनों में रोजाना करीब ८० लाख यात्री यात्रा करते हैं। हालत यह है कि इतनी ज्यादा संख्या में यात्रा करने वाले यात्रियों की सुरक्षा राम-भरोसे है। वर्तमान में २००० यात्रियों की सुरक्षा के लिए सिर्फ एक राजकीय रेल पुलिसकर्मी तैनात है। इसके अलावा मौजूदा रेलवे पुलिसकर्मी सुरक्षा कम, वसूली में ज्यादा नजर आते हैं।
जीआरपी में खाली पड़े पदों की बात करें तो ४,१८५ स्वीकृत पदों में से ६९३ पद यानी १६ प्रतिशत पद खाली हैं। अफसरों के २५५ पदों में से भी ६५ पद खाली हैं। मौजूदा १९० अफसरों में सिर्फ १७ महिला अधिकारी हैं। कोविड के दौरान २०१९, २०२० और २०२१ में भर्ती रोक दी गई थी, जबकि हर साल करीब १,५०० पुलिसकर्मी रिटायर हो जाते हैं। १० साल से ज्यादा समय से ये पद खाली हैं।
स्टाफ की कमी का सीधा असर यात्रियों की सुरक्षा पर पड़ रहा है। २०२५ में भी रोजाना औसतन ६ लोगों की मौत रेल ट्रैक पर हुई है। नालासोपारा, कल्याण, ठाणे, कुर्ला और सीएसएमटी जैसे स्टेशनों पर भीड़ के समय छेड़छाड़, उत्पीड़न, चोरी, लूट और हत्या की घटनाएं आम हैं, लेकिन स्टाफ न होने से जीआरपी समय पर पहुंच ही नहीं पाती। तकनीकी सपोर्ट भी जीरो है। हेल्पडेस्क अब जाकर शुरू किए जा रहे हैं, क्योंकि यात्रियों को पता ही नहीं होता कि मदद के लिए कहां जाएं। बताया जाता है कि १९९९ के बाद से जीआरपी के स्टाफ में कोई खास बढ़ोतरी नहीं हुई है, जबकि यात्री दोगुने हो गए। जीआरपी ने ३५०० अतिरिक्त पुलिसकर्मियों की मांग की है।
५ माह में १३ जवान वसूली के आरोप में सस्पेंड
-चौंकाने वाली बात यह है कि जिन पुलिसवालों को सुरक्षा करनी थी, वही वसूली गैंग बना लिए हैं। पिछले ५ महीनों में १३ जीआरपी कर्मियों को वसूली के आरोप में सस्पेंड किया गया है।
– ये लोग मुंबई सेंट्रल, दादर, कुर्ला, बांद्रा टर्मिनस, बोरीवली, ठाणे, कल्याण और पनवेल में लंबी दूरी के यात्रियों को निशाना बनाते हैं।
-कैश या गहने मिलते ही यात्रियों को बिना सीसीटीवी वाले कमरों में ले जाकर धमकाया जाता है, पीटा जाता है और पैसे वसूले जाते हैं। मुंबई सेंट्रल पर तो तीन पुलिसकर्मियों ने राजस्थान के ज्वैलर से ३०,००० रुपए ऐंठ लिए।
