-लोकल हत्याकांड में मारे गए मयंक का परिवार टूट गया
सामना संवाददाता / मुंबई
गत दिनों लोकल ट्रेन में मामूली विवाद के बाद २१ वर्षीय मयंक लोहार की चाकू मारकर हत्या ने पूरे शहर को झकझोर दिया है। बेटे की मौत के सदमे में डूबी मां बार-बार यही कहती रही है मेरा बच्चा भूखा है, उसने कुछ नहीं खाया। उनका यह वाक्य उस असहनीय पीड़ा को बयान करता है, जिसमें एक मां अब भी अपने बेटे की मृत्यु को स्वीकार नहीं कर पा रही है।
उल्लेखनीय है कि मयंक २३ जून की रात चर्चगेट-नालासोपारा फास्ट लोकल के प्रथम श्रेणी डिब्बे में घर लौट रहा था। पुलिस के अनुसार, भारी बारिश के कारण डिब्बे का दरवाजा बंद रखने को लेकर उसका एक सहयात्री से विवाद हो गया। आरोप है कि विवाद बढ़ने पर रोशन सुवर्णा ने मयंक के पेट में चाकू मार दिया और बोरीवली स्टेशन पर उतरकर फरार हो गया। मयंक को अस्पताल ले जाया गया, लेकिन उसकी जान नहीं बच सकी। आरोपी को बाद में पनवेल से गिरफ्तार कर लिया गया।
यात्रियों और पुलिसवालों पर बहन ने उठाए सवाल
मयंक की बहन ने डिब्बे में मौजूद यात्रियों और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि जब उसके भाई पर हमला हो रहा था, तब यात्री और पुलिस कहां थे? परिवार का कहना है कि समय रहते किसी ने हस्तक्षेप किया होता तो शायद मयंक बच सकता था। यह घटना केवल एक हत्या नहीं, बल्कि सार्वजनिक स्थानों पर बढ़ती हिंसा और तमाशबीन होती भीड़ पर भी कठोर प्रश्न है।
