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परभणी और धाराशिव में उद्धव ठाकरे का जोरदार हमला… भाजपा है राम मंदिर लूटने वाली बाबर जनता पार्टी!

-निष्ठावान कार्यकर्ताओं की उमड़ी भीड़, सभागृह पड़े छोटे, सड़कों और गांवों तक स्वागत

सामना संवाददाता / मुंबई

राम मंदिर के लिए क्या नहीं किया, घर-घर जाकर चंदा जुटाया, शिलाएं एकत्र कीं और ‘मंदिर वहीं बनाएंगे’ के नारे लगाए, किस लिए? तुम्हें मंदिर निर्माण नहीं करना था बल्कि लूट का कारोबार शुरू करना था! यह नई भाजपा है! यह राम मंदिर को लूटने वाली बाबर जनता पार्टी है। बाबर ने पहले राम मंदिर को तोड़ा था और अब इस बाबर ने मंदिर को लूटा है। मंदिर को लूटने वालों की ये औलाद और बाबर की दाढ़ी खुजाने गए गद्दारों के गैंग पर शिवसेनापक्षप्रमुख ने जमकर हमला बोला। उन्होंने कहा कि हमारी मशाल केवल एक चुनाव चिह्न नहीं है, बल्कि महाराष्ट्र में फैली गद्दारी की बीमारी को खत्म करने के लिए यह मशाल लगातार जलती रहनी चाहिए।
इस दौरान मंच पर युवासेनाप्रमुख, विधायक आदित्य ठाकरे, सांसद संजय राऊत, अरविंद सावंत, अनिल देसाई, चंद्रकांत खैरे और अंबादास दानवे, विनायक राऊत, विधायक डॉ. राहुल पाटील, विधायक कैलास पाटील, विधायक प्रवीण स्वामी सहित कई नेता उपस्थित थे।
सांसदों की तोड़-फोड़ क्यों की जा रही है, जरा सोचिए
मध्य प्रदेश में शिवराज सिंह चौहान के चेहरे पर चुनाव जीता गया, लेकिन बाद में उन्हें ही ‘मामा’ बना दिया। नितिन गडकरी दोबारा पार्टी अध्यक्ष बनने वाले थे, उनके भी पर कतर दिए गए। अब देवेंद्र फडणवीस के पर काटने की कोशिश हो रही है। तृणमूल कांग्रेस के सांसदों को तोड़ा गया और उन्हें किसी अनजान दल में भेज दिया। शिवसेना से अलग हुए गद्दारों को भाजपा में नहीं लिया गया, बल्कि उन्हें शिंदे गुट में भेजा गया। यह पूरी तोड़ फोड़ सिर्फ प्रधानमंत्री पद की कुर्सी के लिए की जा रही है, ताकि समय आने पर ये गद्दार उनके साथ खड़े रहें। ऐसा षड्यंत्र है।

प्रेम और निष्ठा की प्रतीक है यहां उमड़ी भीड़…उद्धव ठाकरे ने कार्यकर्ताओं का जताया आभार
परभणी और धाराशिव सभा में उमड़ी भारी भीड़ को देखकर शिवसेनापक्षप्रमुख उद्धव ठाकरे ने कहा कि यह प्रेम, यह निष्ठा और यह समर्थन शिवसेनाप्रमुख बालासाहेब ठाकरे की कमाई है। ये केवल राजनीतिक सभाएं नहीं हैं, मैं अपने कार्यकर्ताओं से मिलने आया हूं और परभणी तथा धाराशिव की जनता का आभार व्यक्त करने आया हूं।
उन्होंने कहा कि परभणी की जनता ने शिवसेना को महापौर दिया, लेकिन दुर्भाग्य से इतिहास ने खुद को दोहराया। शिवसैनिकों और महाविकास आघाड़ी के कार्यकर्ताओं ने जिन लोगों को अथक मेहनत करके चुना, वही बाद में गद्दार बन गए।
उद्धव ठाकरे ने कहा कि जब हमने परभणी में मुस्लिम महापौर दिया तो हमारी आलोचना की गई और कहा गया कि हमने बालासाहेब के विचार छोड़ दिए हैं, लेकिन आप स्थानीय निकाय चुनावों में जिन उम्मीदवारों को उतार रहे हैं, उनके बारे में जानकारी लीजिए—उन पर कितने आपराधिक मामले दर्ज हैं और वे कितनी बार जेल में रह चुके हैं। हमारे महापौर ने एक संत के कीर्तन के लिए अपने खेत की जमीन उपलब्ध कराई थी और तुमने जो किया, वह वास्तव में शिवसेनाप्रमुख बालासाहेब के विचारों के साथ विश्वासघात है।
कारगिल से ज्यादा महत्वपूर्ण है…दल-बदल की राजनीति
उद्धव ठाकरे ने कहा कि लोग पार्टी क्यों छोड़ रहे हैं, इस पर आत्मचिंतन करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि आत्मचिंतन सभी को करना चाहिए। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी टूटने का मामला चार वर्षों से कोर्ट में लंबित है, इस पर भी आत्मपरीक्षण होना चाहिए। हमारे चार सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखकर कहा था कि यदि कोई भी आपके पास आए तो कोई निर्णय लेने से पहले हमारी बात अवश्य सुनी जाए। उन्होंने बताया कि जब लोकसभा अध्यक्ष की ओर से जवाब आया, तब अरविंद सावंत संसदीय समिति के साथ कारगिल दौरे पर थे। वे २५ तारीख को लौटने वाले थे, लेकिन उन्हें २४ तारीख को ही दिल्ली बुलाया गया। उद्धव ठाकरे ने कहा कि सावंत ने अध्यक्ष को बताया कि वे संसदीय समिति के साथ कारगिल दौरे पर हैं और पूछा कि क्या उन्हें बीच में दौरा छोड़कर आना चाहिए। उन्हें तत्काल आने के लिए भी कहा गया। उन्हें कारगिल की परवाह नहीं थी, लेकिन उनके आकाओं को पार्टी तोड़ने की जल्दी थी, ऐसा तंज उद्धव ठाकरे ने कसा।
लोकसभा अध्यक्ष अपनी गरिमा बनाए रखें!
उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि बाबासाहेब आंबेडकर के बनाए हुए संविधान के अनुसार ही लोकसभा अध्यक्ष को न्याय करना चाहिए। पार्टी सिर्फ सांसदों और विधायकों के आधार पर नहीं होती, बल्कि कार्यकर्ताओं के आधार पर उसकी पहचान और मान्यता होती है। यदि दो-तिहाई सदस्य दल-बदल भी कर लें, तब भी जनता इसे स्वीकार नहीं करेगी। उद्धव ठाकरे ने कहा कि लोकसभा अध्यक्ष जैसे संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति से कानून का उल्लंघन नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि इतिहास में रामशास्त्री प्रभुणे का नाम एक निष्पक्ष न्यायविद के रूप में दर्ज है। आपकी पहचान संविधान को तोड़ने वाले व्यक्ति के रूप में न हो, इसका ध्यान रखें। उद्धव ठाकरे ने कहा कि जब तक शिवसेनाप्रमुख बालासाहेब ठाकरे ने हिंदुत्व का मुद्दा नहीं उठाया था, तब तक भाजपा की राजनीतिक ताकत बहुत सीमित थी। उन्होंने कहा कि उस समय यदि हमने भाजपा को राजनीतिक रूप से समाप्त कर दिया होता, तो बेहतर होता।
बाबरी मस्जिद गिरने के बाद भाग गए थे
उद्धव ठाकरे ने भाजपा पर हिंदुत्व के मुद्दे पर अवसरवादी राजनीति करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि पहले भाजपा के कई नेता स्वयं को गांधीवादी समाजवादी बताते थे, लेकिन बाद में हिंदू वोटों की राजनीति को देखते हुए रथयात्रा निकाली गई। उन्होंने कहा कि ‘मंदिर वहीं बनाएंगे’ का नारा दिया गया। हम भी उनके साथ थे, लेकिन बाबरी ढांचा गिरने के बाद वे लोग भाग गए। भाजपा नेता सुंदर सिंह भंडारी ने कहा था कि यह उनका काम नहीं है, यह शिवसैनिकों का काम हो सकता है। तब बालासाहेब ठाकरे ने स्पष्ट कहा था कि यदि यह काम मेरे शिवसैनिकों ने किया है, तो मुझे उन पर गर्व है।
भाजपा के भीतर ही शुरू हो गया है ‘ऑपरेशन देवेंद्र’
सांसदों की तोड़फोड़ के मुद्दे पर उद्धव ठाकरे ने कहा कि इसके पीछे बड़ी राजनीतिक रणनीति काम कर रही है। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश में शिवराज सिंह चौहान के चेहरे पर चुनाव जीता गया, लेकिन बाद में उन्हें ‘मामा’ बनाकर किनारे कर दिया गया। उन्होंने कहा कि नितिन गडकरी दूसरी बार भाजपा अध्यक्ष बनने वाले थे, लेकिन उनके भी पर काट दिए गए। अब देवेंद्र फडणवीस की बारी है।
गद्दारों के खिलाफ जनता को चलाना होगा हंटर
उद्धव ठाकरे ने कहा कि एक वर्ष पहले मराठवाड़ा में आई बाढ़ से भारी तबाही हुई थी। उस समय वे किसानों से मिलने पहुंचे थे, लेकिन उस क्षेत्र का सांसद वहां दिखाई नहीं दिया। वे किसानों के खेतों तक गए और किसानों को कर्जमुक्त करने की मांग की। अब वही सांसद कह रहे हैं कि उद्धव ठाकरे ने हमारी ओर ध्यान नहीं दिया। यदि मैंने ध्यान दिया होता तो आपकी हरकतों का पता पहले ही चल जाता। यह मेरी गलती है और जनता ने जो हंटर मुझे दिया है, उसका इस्तेमाल अब जनता को ही करना है। जब भी कोई गद्दार दिखाई दे, उससे जवाब मांगिए।
जनता से नहीं तो कम से कम अपने मन में शर्म करो
उद्धव ठाकरे ने कहा कि लोकसभा चुनाव के दौरान मैं प्रचार के लिए यहां आया था। उस समय भारी बारिश हो रही थी, लेकिन बारिश के बीच भी विशाल सभा हुई। एक तरफ राहुल पाटील थे और दूसरी तरफ दूसरे नेता थे। मैंने दोनों के हाथ उठाए थे। एक आज भी मेरे साथ खड़ा है, जबकि दूसरा हाथ छोड़कर विमान में बैठ गया और बादाम खाते हुए चला गया। यहां किसान भूखा है और ये लोग हवाई जहाज से घूम रहे हैं। उन्होंने उस यात्रा के वीडियो भी सोशल मीडिया पर डाले। यह कितनी बेशर्मी है।

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