मुख्यपृष्ठसमाचारहिंदुस्थानी जमीनों पर चीनी कब्जा!

हिंदुस्थानी जमीनों पर चीनी कब्जा!

-मोदी का ‘सशक्त भारत’ पीएलए के घेरे में

-चीन ने बनाईं सड़कें और मिलिट्री कैंप

-अरुणाचलवासियों ने खोली ‘नए भारत’ की पोल

सामना संवाददाता / गुवाहाटी

चीन की विस्तारवादी नीति थमने का नाम नहीं ले रही है। चीन भले ही भारत के साथ रिश्ते बढ़ाने की बात करता रहा हो, मगर उसका विश्वासघात किसी से छिपा नहीं है। वह बीते ६ साल से अरुणाचल प्रदेश के सीमावर्ती गांवों की जमीन को निगल रहा है। ये बात खुद अरुणाचल प्रदेश के एक आदिवासी समुदाय ने बताई है। चीन के विश्वासघात की यह पोल नाह समुदाय ने खोलकर रख दी है। उनका दावा है कि चीन ने भारत की सीमा के अंंदर सड़कें और मिलिट्री कैंप बना लिए हैं।
एक रिपोर्ट के अनुसार, अरुणाचल प्रदेश के ‘नाह’ आदिवासी समुदाय ने चीन की भारत के सीमावर्ती गांवों में घुसपैठ को लेकर यह चिंता जताई है। चीन का यह विश्वासघात अरुणाचल प्रदेश के अपर सुबनसिरी जिले में अंतरराष्ट्रीय सीमा पर हो रहा है। अरुणाचल प्रदेश के नाह समुदाय का दावा है कि पिछले छह सालों में चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) ने उनके पशु चराने, शिकार करने और खेती करने वाली जमीन के एक बड़े हिस्से पर कब्जा कर लिया है।
रोज इंच-इंच गवां रहे अपनी जमीन
चाडर ने मेमोरेंडम में कहा, ‘हमें अपनी सेना पर कोई शक नहीं है और हम हमेशा उन पर भरोसा करते हैं। वे कई सालों से हमारी जमीन की रक्षा कर रहे हैं, लेकिन उनकी कोशिशें काफी नहीं हैं। टक्सिंग इलाके में चीनी सेना की मौजूदा गतिविधियों का मकसद और रफ्तार बहुत चिंताजनक है और यह हमारे लिए गंभीर चिंता का विषय है। हम दिन-ब-दिन अपनी जमीन इंच-दर-इंच उनके हाथों गवां रहे हैं।’
पांच साल में किया कब्जा
आदिवासी संगठन के नाह के अनुसार, कई ऐसी जगहें जिन पर २०२० तक उनका पारंपरिक नियंत्रण था, उन पर कथित तौर पर पीएलए ने कब्जा कर लिया है। संगठन ने कहा कि असाफिला इलाके में ओयिंग, पनिआर (चुजार्टा इलाका), मारपन (मारनाफे), पोट्रांग (झील) और टिडिंगटंग जैसी जगहें धीरे-धीरे चीनी घुसपैठ की चपेट में आ गई हैं।
एनडब्ल्यूएस ने किया दावा
रिपोर्ट के अनुसार, हाल ही में अपर सुबनसिरी के डिप्टी कमिश्नर को सौंपे गए एक ज्ञापन में नाह वेलफेयर सोसायटी (एनडब्ल्यूएस) के अध्यक्ष केरू चाडर ने कहा, ‘हमारी पुश्तैनी जमीनें अब चीनी पीएलए के कब्जे में हैं।’ नाह समुदाय ने बताया कि ये हड़पी गईं जमीनें जो शिकार के इलाके थे और जहां हम कुछ साल पहले तक आजादी से घूमते थे और जंगल से उपज जुटाते थे और हमारे मवेशियों के चरने के इलाके हैं।
हमारी पांच महत्वपूर्ण जमीनें ‘हड़पीं’
एनडब्ल्यूएस ने पांच जगहों पर चीन की गतिविधियों का आरोप लगाया, जो उनके अनुसार अपर सुबनसिरी में टक्सिंग रेवेन्यू सर्कल के तहत आती हैं। उन्होंने कहा कि चीनी सरकार रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण जगहों पर कब्जा करके अंतरराष्ट्रीय सीमा के पास के इलाकों पर तेजी से अपना नियंत्रण बढ़ा रही है।

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