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गद्दारों के खिलाफ जनता में आक्रोश!.. उद्धव ठाकरे का जोरदार हमला… सरकार का बैल निकम्मा निकला!.. काम पर लगाओ!

-‘पेपर लीक हुआ… जय श्रीराम!

-पेट्रोल के दाम बढ़े… जय श्रीराम!

-किसानों को समर्थन मूल्य नहीं… जय श्रीराम!

-यह तो नकली हिंदुत्व है’

सामना संवाददाता / मुंबई

भाजपा नेतृत्व वाली केंद्र और महायुति सरकार केवल तोड़फोड़ की राजनीति में व्यस्त है। पेपर लीक से परेशान युवाओं और कर्ज में डूबे किसानों की ओर देखने तक का समय सरकार के पास नहीं है। खेत जोतने के लिए किसानों के पास बैल तक नहीं है। सरकार ने एक किसान को जो बैल दिया, वह भी बीमार निकला। इस सरकार का बैल भी बेकार साबित हुआ है। अब इन गद्दारों और निकम्मे सांसदों को ही हल में जोत देना चाहिए।
इस तरह का तीखा हमला शिवसेनापक्षप्रमुख उद्धव ठाकरे ने रविवार को शिर्डी में आयोजित एक विशाल सभा को संबोधित करते हुए किया। सभा के दौरान शिर्डी के सांसद के खिलाफ जनता के मन में सुलगता आक्रोश साफ दिखाई दिया। निष्ठावान शिवसैनिकों की भारी भीड़ सभा में उमड़ी। इसी भीड़ की मौजूदगी में उद्धव ठाकरे ने गद्दार सांसद और सरकार पर जमकर हमला बोला। शिवसेना से विश्वासघात कर शिंदे गुट में गए सांसदों के खिलाफ राज्यभर में आक्रोश की लहर है। इसी के मद्देनजर गद्दारों को वोट देने वाले मतदाताओं और शिवसैनिकों से संवाद करने के लिए शिवसेनापक्षप्रमुख उद्धव ठाकरे महाराष्ट्र दौरे पर हैं। यवतमाल, वाशिम, हिंगोली, परभणी और धाराशिव के बाद रविवार को शिर्डी में उनकी विशाल सभा हुई। इस दौरान उन्होंने सांसद सदाशिव लोखंडे वाकचौरे पर जमकर निशाना साधा।
इस अवसर पर शिवसेना नेता व सांसद संजय राऊत, युवासेना प्रमुख आदित्य ठाकरे, सांसद अरविंद सावंत, पूर्व सांसद विनायक राऊत, सांसद अनिल देसाई, संपर्कप्रमुख एवं विधायक सुनील शिंदे सहित पार्टी के कई पदाधिकारी उपस्थित थे।
ये तो खाऊसाहेब हैं…
उद्धव ठाकरे ने कहा कि आज स्थिति ऐसी हो गई है कि भरोसा किस पर किया जाए। कुछ लोगों की नस-नस और खून में गद्दारी भरी होती है। खाऊसाहेब वाकचौरे इसका जीता-जागता उदाहरण हैं। ये खाऊसाहेब हैं। जहां जाते हैं, वहीं खाते हैं। सार्इंबाबा के दर्शन के लिए भी जाएं तो इनकी नजर चढ़ावे पर रहती है।
उन्होंने आगे कहा कि शिवसैनिकों का कहना है कि खाऊसाहेब का जाना शुभ संकेत है। हमने २००९ में इस गद्दार को जिताया था। २०१४ में यह भाग गया और हमारी सरकार आ गई। अब यह फिर भाग गया है। अगर पहले पता होता तो इसे पहले ही भगा देते। लेकिन यह जहां भी जाता है, वहां नुकसान ही होता है। कांग्रेस में गया तो उनकी सरकार चली गई। अब शाह सेना में गया है, वहां की सरकार भी गिरेगी।
शायद भगवान ने ही उन्हें ऐसी बुद्धि दी होगी!
विकास निधि का हवाला देकर दल-बदल का समर्थन करने वाले वाकचौरे पर उद्धव ठाकरे ने तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि इन खाऊसाहेब को १५ करोड़ रुपये की विकास निधि मिली थी, लेकिन उसमें से केवल ७० लाख रुपये ही खर्च किए गए। १३५ कामों में से केवल दो काम पूरे हुए। फिर विकास निधि का सवाल कहां से आता है?
उद्धव ठाकरे ने कहा कि शिर्डी में विकास निधि की बातें नहीं की जानी चाहिए। उन्होंने कहा, ‘जब गरीबों के घरों में तेल नहीं था, तब सार्इंबाबा ने पानी से दीप जलाए थे। हमें वही शक्ति सार्इंबाबा से लेनी चाहिए। सामने सत्ता हो, पैसा हो, लेकिन जो काम करें, उस पर श्रद्धा होनी चाहिए और उस श्रद्धा का फल मिलने तक सबुरी भी रखनी चाहिए।’ उन्होंने कहा कि शिर्डी में श्रद्धा और सबुरी का विशेष महत्व है। ‘हमारी श्रद्धा अपने काम और भगवा ध्वज पर है, लेकिन इन लोगों की किसी पर श्रद्धा नहीं है। इनका रोज नया मालिक होता है और सबुरी नाम की कोई चीज नहीं है। यदि उस समय ये रुक जाते तो केंद्र में हमारी सरकार आ गई थी। भविष्य में भी हमारी सरकार आएगी, लेकिन ये तब भी नहीं रुके।’
उद्धव ठाकरे ने कहा कि जो कुछ होता है, अच्छे के लिए होता है। ऐसे भ्रष्ट विचार वाले गद्दार हमारे साथ नहीं रहने चाहिए थे। शायद भगवान ने ही उन्हें सद्बुद्धि या दुर्बुद्धि दी होगी। उन्होंने आगे कहा, ‘यह सांसद फिर से गायब हो गया है। अगर कहीं मिल जाए तो उसे छोड़ना मत और वापस भी मत लाना।’
‘गद्दार खाऊवीरों को माफी नहीं’
उद्धव ठाकरे ने अपने संबोधन में कहा कि दौरे के दौरान कई स्थानीय लोगों ने उन्हें संबंधित नेताओं के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा, ‘आप लोगों ने मुझे पहले क्यों नहीं बताया? अब जो कुछ सुन और देख रहा हूं, उसके बाद यह सवाल उठता है कि आखिर विश्वास किस पर किया जाए।उन्होंने आगे कहा कि विश्वासघात करने वालों को माफ नहीं किया जाएगा। उद्धव ठाकरे ने संबंधित सांसद पर तीखा हमला करते हुए कहा कि ‘वे भाऊसाहेब नहीं, बल्कि ‘खाऊसाहेब’ हैं।’
मुस्लिम शिवसैनिक की सराहना, सभा में गूंजे नारे
सभास्थल पर संगमनेर के मुस्लिम शिवसैनिक अजीज मोमीन ‘मैं शिवसैनिक हूं’ लिखी तख्ती लेकर पहुंचे थे, जिसने सभी का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया। शिवसेनापक्षप्रमुख उद्धव ठाकरे ने भरी सभा में उनकी सराहना की। उद्धव ठाकरे ने कहा कि यह दृश्य शिवसेनाप्रमुख बालासाहेब ठाकरे की उस सोच को दर्शाता है, जिसमें महाराष्ट्र और समाज के सभी वर्गों को साथ लेकर चलने की भावना शामिल थी। उनके इस बयान पर सभा में उपस्थित कार्यकर्ताओं ने जोरदार तालियों से स्वागत किया।
गद्दारों के खिलाफ नारेबाजी
सभा के दौरान शिवसैनिकों ने पार्टी छोड़कर गए नेताओं के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। कार्यकर्ताओं ने संबंधित सांसदों के विरोध में कई राजनीतिक नारे लगाए और विश्वासघात को लेकर अपनी नाराजगी व्यक्त की। पूरे कार्यक्रम में इस मुद्दे को लेकर कार्यकर्ताओं में भारी आक्रोश देखा गया। शिवसेनापक्षप्रमुख उद्धव ठाकरे के सभास्थल पर आगमन के साथ ही ‘विजय हो’, ‘कौन आया रे कौन आया, शिवसेना का बाघ आया’ जैसे जोशीले नारों से पूरा परिसर गूंज उठा। कार्यकर्ताओं ने उनका भव्य स्वागत किया और उन्हें विशाल पुष्पहार अर्पित किए।
फडणवीस को रोकने के लिए शाह सेना को सुपारी…
एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाले गुट पर निशाना साधते हुए शिवसेनापक्षप्रमुख उद्धव ठाकरे ने उसे `शाह सेना’ बताया। उन्होंने कहा, `मैं शाह सेना के बारे में कुछ नहीं बोलूंगा। वे गद्दार उस लायक भी नहीं हैं। लेकिन मुझे लगता है कि देवेंद्र फडणवीस प्रधानमंत्री पद की दौड़ में आगे न बढ़ें, इसके लिए कोई साजिश चल रही है। क्या उसमें शाह सेना का इस्तेमाल किया जा रहा है? इस संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।’
फडणवीस के भविष्य की चिंता
उन्होंने कहा कि भाजपा में इन दिनों जिस तरह से गद्दारों को बढ़ावा दिया जा रहा है, उससे मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के राजनीतिक भविष्य को खतरा है। यदि महाराष्ट्र का कोई नेता देश का प्रधानमंत्री बनने की महत्वाकांक्षा रखता है तो उसमें कुछ भी गलत नहीं है। लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर कुछ नेताओं को आगे बढ़ने से रोकने के लिए राजनीतिक रणनीति बनाई जा रही है, ऐसा संदेह होता है।
उन्होंने कहा कि एक समय नितिन गडकरी का नाम प्रधानमंत्री पद के लिए चर्चा में था और यह भी कहा जाता था कि उन्हें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का समर्थन प्राप्त है, लेकिन बाद में उन्हें विभिन्न तरीकों से बदनाम किया गया। अब क्या देवेंद्र फडणवीस के साथ भी ऐसा ही कुछ हो रहा है? क्या उन्हें प्रधानमंत्री पद की दौड़ से दूर रखने के लिए कोई साजिश रची जा रही है? इस पर विचार करने की आवश्यकता है।
नरसिम्हा राव को विपक्ष का समर्थन मिला था
देवेंद्र फडणवीस के प्रधानमंत्री बनने पर समर्थन देने के सवाल पर उद्धव ठाकरे ने कहा कि यदि महाराष्ट्र का कोई व्यक्ति देश का प्रधानमंत्री बनता है तो शिवसेना उसके साथ मजबूती से खड़ी रहेगी, लेकिन गद्दार को कभी समर्थन नहीं दिया जाएगा।
इस दौरान उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री पी. वी. नरसिम्हा राव और आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री एन. टी. रामाराव का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि जब पी. वी. नरसिम्हा राव प्रधानमंत्री बनने के बाद आंध्र प्रदेश से चुनाव लड़ रहे थे, तब कट्टर कांग्रेस विरोधी होने के बावजूद एन. टी. रामाराव ने कहा था कि मेरे राज्य का व्यक्ति प्रधानमंत्री बन रहा है, इसलिए मैं उनके खिलाफ उम्मीदवार नहीं उतारूंगा। उद्धव ठाकरे ने कहा कि अन्य राज्य अपनी अस्मिता और नेतृत्व पर गर्व करते हैं, इसलिए महाराष्ट्र को भी अपने नेताओं के पीछे एकजुट होकर खड़ा होना चाहिए।
सीएम फडणवीस को विधानसभा अध्यक्ष से मराठी सीखनी चाहिए
देवेंद्र फडणवीस ने हाल ही में कहा था कि `मैं कोई पक्षी नहीं हूं, मेरे पंख वैâसे काटे जाएंगे?’ इस पर प्रतिक्रिया देते हुए उद्धव ठाकरे ने कहा कि `पंख काटना’ मराठी भाषा का एक सामान्य मुहावरा है। इसका शाब्दिक अर्थ निकालकर राजनीति करने वालों को पहले मराठी भाषा को समझना चाहिए।
उन्होंने कहा कि यदि महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री होने के बावजूद उन्हें मराठी के सामान्य मुहावरे समझ में नहीं आते, तो उन्हें पहले मराठी का अध्ययन करना चाहिए। जरूरत पड़े तो विधानसभा अध्यक्ष से भी मराठी सीख सकते हैं। उद्धव ठाकरे की इस टिप्पणी पर उपस्थित लोगों के बीच हंसी और तालियों की गड़गड़ाहट सुनाई दी।

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