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सरकार की नाकामी से बढ़ रही महंगाई

-विधान परिषद में विपक्ष के नेता अंबादास दानवे ने सरकार पर साधा निशाना

सामना संवाददाता / मुंबई

महाराष्ट्र विधान परिषद में विपक्ष के नेता अंबादास दानवे ने राज्य सरकार पर महंगाई को लेकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि राज्य में बढ़ती महंगाई का कारण अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियां या खाड़ी क्षेत्र का युद्ध नहीं, बल्कि सरकार की गलत नीतियां और प्रशासनिक विफलता है। वे विपक्ष की ओर से लाए गए प्रस्ताव संख्या २६० पर चर्चा के दौरान बोल रहे थे।
दानवे ने कहा कि महंगाई की समस्या युद्ध शुरू होने से पहले ही गंभीर थी। सरकार ने सरकारी कर्मचारियों का महंगाई भत्ता बढ़ाकर स्वयं यह स्वीकार किया है कि राज्य में महंगाई बढ़ी है। उन्होंने आरोप लगाया कि पेट्रोल, बिजली और उत्पादन शुल्क पर बढ़े करों के कारण आम जनता पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ा है। उन्होंने सवाल उठाया कि जून २०२६ में कच्चे तेल की कीमत घटकर ७४ डॉलर प्रति बैरल तक आने के बावजूद राज्य के लोगों को महंगा र्इंधन क्यों बेचा जा रहा है।
किसकी जेब में जा रहा है बीच का पैसा
अंबादास दानवे ने कहा कि किसानों को दूध का केवल ३० रुपये प्रति लीटर दाम मिलता है, जबकि मुंबई और पुणे के उपभोक्ताओं को वही दूध ७० रुपये प्रति लीटर खरीदना पड़ता है। प्याज, अरहर, चना और गेहूं जैसी फसलों की भी यही स्थिति है। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्ष २०१४ की तुलना में यूरिया, डीएपी और पोटाश जैसे रासायनिक उर्वरकों की कीमतों में काफी बढ़ोतरी हुई है। उन्होंने सवाल किया कि किसानों और उपभोक्ताओं के बीच का यह अतिरिक्त पैसा आखिर किसकी जेब में जा रहा है।
सिर्फ ७० हजार नौकरियों का एलान
दानवे ने कहा कि राज्य में सात लाख सरकारी पदों में से करीब दो लाख पद खाली पड़े हैं। सरकार ने ७० हजार नौकरियों की भर्ती का केवल एलान किया है, लेकिन अब तक उसके लिए कोई ठोस योजना सामने नहीं आई है। उन्होंने आरोप लगाया कि रोजगार के मुद्दे पर सरकार केवल घोषणाएं कर रही है, जबकि युवाओं को अब तक वास्तविक अवसर नहीं मिल पाए हैं।

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