नूयी की टिप्पणियों को जहां कुछ लोग भारत की व्यवस्था की आलोचना के रूप में देख रहे हैं, वहीं अन्य लोग इसे अवसरों, लैंगिक समानता और कॉरपोरेट संस्कृति पर एक व्यक्तिगत अनुभव मान रहे हैं।
पेप्सिको की पूर्व मुख्य कार्यकारी अधिकारी इंदिरा नूयी ने अमेरिका, भारत और चीन की व्यवस्थाओं की तुलना करते हुए कुछ ऐसी टिप्पणियां की हैं, जिन पर बहस छिड़ सकती है। उन्होंने अमेरिका की योग्यता आधारित कॉरपोरेट व्यवस्था की प्रशंसा करते हुए कहा कि यदि वह भारत में ही रहतीं, तो शायद किसी बड़ी कंपनी के शीर्ष पद तक नहीं पहुंच पातीं।
एक सार्वजनिक संवाद के दौरान नूयी ने कहा कि कोई अप्रवासी लगभग खाली हाथ अमेरिका पहुंचकर एक प्रतिष्ठित अमेरिकी कंपनी का सीईओ बन सकता है। उनके अनुसार, ऐसी सामाजिक और व्यावसायिक गतिशीलता दुनिया के बहुत कम देशों में देखने को मिलती है। उन्होंने कहा, ‘अगर मैं भारत में रहती, तो शायद कभी सीईओ नहीं बन पाती।’ नूयी वर्ष २००६ से २०१८ तक पेप्सिको की सीईओ रही थीं। भारत और चीन की तुलना करते हुए उन्होंने चीन को बुनियादी सुविधाओं और दैनिक व्यवस्था के मामले में अधिक संगठित बताया। उन्होंने कहा कि चीन में यात्रा और कामकाज अपेक्षाकृत व्यवस्थित दिखाई देता है, जबकि भारत में सड़कों पर वाहन, पशु और लोगों की भीड़ एक साथ नजर आती है।
अराजक मगर आकर्षक है भारत
हालांकि, नूयी ने भारत की अव्यवस्था को केवल नकारात्मक रूप में प्रस्तुत नहीं किया। उन्होंने भारत को एक ‘अराजक, लेकिन आकर्षक’ देश बताते हुए कहा कि यहां का जीवन और ऊर्जा लोगों को अपनी ओर खींचती है। उनके मुताबिक, चीन की प्रगति अधिक योजनाबद्ध और तेज दिखाई देती है, जबकि भारत का विकास धीमा और उलझा हुआ नजर आता है; लेकिन यही धीमी और लोकतांत्रिक प्रक्रिया लंबे समय में भारत की ताकत भी बन सकती है।
